भोपाल/वाराणसी , अप्रैल 29 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' का अवलोकन किया और इसे आधुनिक तकनीक तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान का अद्भुत संगम बताया।

प्रधानमंत्री ने घड़ी के डिजिटल फलक पर प्रदर्शित भारतीय पंचांग, मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की गणना की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत की समृद्ध कालगणना परंपरा को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करती है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में इस वैदिक घड़ी की स्थापना उज्जैन में की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर इसे देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में स्थापित करने की योजना के तहत वाराणसी में भी स्थापित किया गया है।

यह घड़ी भारतीय वैदिक कालगणना प्रणाली पर आधारित है, जिसमें समय का निर्धारण सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक किया जाता है। एक पूर्ण दिवस को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया जाता है, जिसमें सूर्योदय से सूर्यास्त तक 15 और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक 15 मुहूर्त होते हैं।

घड़ी में वैदिक समय, भारतीय मानक समय, पंचांग, विक्रम संवत, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्य एवं चंद्र की स्थिति सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित होती हैं। यह स्थान-विशिष्ट सूर्योदय के आधार पर समय निर्धारित करती है, जिससे हर स्थान का वैदिक समय अलग-अलग दर्शाया जा सकता है।

संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा विकसित यह घड़ी भारत की प्राचीन कालगणना प्रणाली को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। सरकार की योजना के अनुसार भविष्य में अयोध्या सहित देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों और ज्योतिर्लिंगों में भी इस प्रकार की वैदिक घड़ियां स्थापित की जाएंगी, जिससे नई पीढ़ी को भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ा जा सके।

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