वाराणसी , जुलाई 28 -- उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में पहली बार भगवान श्रीराम के इतिहास पर केंद्रित नौ दिवसीय 'राम परिवार गाथा' एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद और विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन 29 जुलाई से 7 अगस्त तक पातालपुरी मठ में होगा।

यह जानकारी मंगलवार को जगद्गुरु बालकदेवाचार्य जी महाराज के शिष्य एवं सिद्धपीठ बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत प्रभुरामदास जी ने दी। आयोजन की शुरुआत 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर होगी। पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालकदेवाचार्य जी महाराज ने बताया कि मठ के द्वार सभी वर्गों के लोगों के लिए खुले हैं तथा धर्म और जाति के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों के भी शामिल होने की संभावना है।

30 जुलाई से प्रतिदिन सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही 'राम परिवार गाथा' का शुभारंभ होगा। कार्यक्रम के दौरान प्रतिदिन भगवान श्रीराम के जीवन और इतिहास से जुड़े एक विषय पर चर्चा की जाएगी। आयोजकों के अनुसार पहली बार संतों के विचारों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर राम परिवार से संबंधित एक ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम के अनुसार 30 जुलाई को श्रीराम की गुरु-भक्ति, 31 जुलाई को माता-पिता की आज्ञा पालन की परंपरा और भारतीय संस्कृति, एक अगस्त को भयमुक्त समाज की अवधारणा, दो अगस्त को श्रीराम के सामाजिक संबंध और व्यवहार, तीन अगस्त को उत्तर और दक्षिण भारत के एकीकरण, चार अगस्त को युद्ध में नीति एवं मर्यादा के पालन, पांच अगस्त को राज्य विस्तार के बजाय राष्ट्रधर्म की स्थापना, छह अगस्त को रामराज्य एवं राजतिलक तथा सात अगस्त को 'भोज-भात' की परंपरा के माध्यम से समरसता और भेदभावमुक्त समाज जैसे विषयों पर ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर व्याख्यान और विमर्श होगा।

महंत प्रभुरामदास जी ने बताया कि भारतीय इतिहास और संस्कृति को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से भगवान श्रीराम से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले शोधार्थियों, शोधकर्ताओं और साहित्यकारों को क्रमशः 5,100, 2,100 और 1,100 रूपये के नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने राम के इतिहास पर शोध करने वाले विद्वानों से सहभागिता का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि जगद्गुरु बालकदेवाचार्य जी महाराज वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस के साक्ष्यों के आधार पर 'राम परिवार गाथा' का वाचन करेंगे। इसमें साहित्य, लोकगीत और लोकसंगीत में राम, राम की राजनीति, समाजनीति, धर्मनीति, अर्थनीति, परिवार, प्रजा, प्रकृति, आदिवासी एवं वनवासी समाज, पशु-पक्षियों, शत्रु नीति, अन्य राज्यों से संबंध, अयोध्या तथा नारी सम्मान जैसे विषयों पर विस्तार से व्याख्यान दिया जाएगा।

महंत प्रभुरामदास जी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजन की जिम्मेदारी विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इतिहासकार डॉ. राजीव श्रीगुरुजी तथा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मृदुला जायसवाल को सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि देश-विदेश के इतिहासकारों और भगवान श्रीराम के इतिहास के विशेषज्ञ विद्वानों को इस संगोष्ठी में आमंत्रित किया गया है।

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