वाराणसी , जून 11 -- वाराणसी के मिर्जामुराद क्षेत्र के आदर्श ग्राम नागेपुर में आशा ट्रस्ट एवं लोक समिति के तत्वावधान में आयोजित किशोरी समर कैंप के अंतर्गत गुरुवार को किशोरियों का शैक्षिक एवं जागरूकता भ्रमण कार्यक्रम थाना मिर्जामुराद में आयोजित किया गया। इस अवसर पर लगभग 150 किशोरियों ने थाना परिसर का भ्रमण किया, पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को निकट से समझा तथा पुलिस अधिकारियों के साथ खुलकर संवाद किया।
कार्यक्रम के दौरान थाना परिसर में विशेष 'किशोरी चौपाल' का आयोजन किया गया। चौपाल को संबोधित करते हुए थानाध्यक्ष गोपाल जी कुशवाहा ने किशोरियों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के लिए संचालित हेल्पलाइन नंबर 112, 181 तथा 1090 के साथ-साथ घरेलू हिंसा, महिला हिंसा कानून, साइबर क्राइम और पॉक्सो अधिनियम सहित महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी साझा की।
परिचर्चा के दौरान किशोरियों ने अत्यंत बेबाकी और आत्मविश्वास के साथ पुलिस व्यवस्था से जुड़े कई व्यावहारिक प्रश्न उठाए। किशोरी सुनीता ने थानाध्यक्ष से सवाल किया, "पुलिस अक्सर लोगों से बात करते समय माँ-बहन की गालियों का प्रयोग क्यों करती है। किसी घटना में जिनका कोई संबंध नहीं होता, उनके लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल कितना उचित है।"इस प्रश्न के बाद अन्य किशोरियों ने भी अपने अनुभवों के आधार पर पुलिस के व्यवहार, ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था तथा महिलाओं की समस्याओं से जुड़े अनेक सवाल पूछे।
थानाध्यक्ष गोपाल जी कुशवाहा ने किशोरियों की जिज्ञासा, तार्किक सोच और बेबाकी की सराहना करते हुए सभी प्रश्नों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच संवाद तथा विश्वास का रिश्ता मजबूत होना चाहिए और पुलिस हमेशा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहती है।
कई किशोरियों ने अपने गांवों में संचालित जुआ एवं अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी की। पुलिस अधिकारियों ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया तथा ग्रामीणों से ऐसे मामलों की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की।
लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने बताया कि आशा ट्रस्ट और लोक समिति द्वारा लोक समिति आश्रम, नागेपुर में 15 मई से चल रहे किशोरी समर कैंप के अंतर्गत किशोरियों को शिक्षा, कला, नेतृत्व विकास, स्वास्थ्य, अधिकार जागरूकता तथा व्यक्तित्व विकास से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि थाना भ्रमण का मुख्य उद्देश्य किशोरियों के मन में पुलिस के प्रति व्याप्त भय और संकोच को दूर करना तथा उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान करना है।
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