वाराणसी , अगस्त 21 -- जापान की 'उगते सूरज की धरती' और आध्यात्मिक नगरी काशी का संगम भारत-जापान के मैत्रीपूर्ण संबंधों को औद्योगिक, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग की नई दिशा देने जा रहा है। जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर के नेतृत्व में 109 सदस्यीय उच्चस्तरीय जापानी प्रतिनिधिमंडल 22 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचेगा।
प्रतिनिधिमंडल में जापान की प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और सीईओ शामिल होंगे। इस दौरे से उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश और औद्योगिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यटन, कौशल विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी गति मिलने की उम्मीद है।
वाराणसी पहुंचने के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का भ्रमण करेगा। इसके बाद दल नमो घाट पर गंगा आरती का विहंगम दृश्य देखेगा। शाम को ताज होटल में आयोजित रात्रिभोज के दौरान जापानी मेहमानों को भारतीय संस्कृति, कला और हस्तशिल्प की झलक दिखाई जाएगी। 23 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सदस्य श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करेंगे, जबकि अन्य सदस्य अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे।
प्रतिनिधिमंडल के दौरे में उत्तर प्रदेश में निवेश एवं औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर विशेष जोर रहेगा। ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, अवसंरचना, पर्यटन और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का प्रयास होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और सिंगल विंडो व्यवस्था को निवेश के लिए अनुकूल माहौल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
जापानी मेहमानों को काशी की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा से परिचित कराने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) और जीआई उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें गुलाबी मीनाकारी, सॉफ्ट स्टोन कार्विंग, लकड़ी के खिलौने, वुडन लैकरवेयर और प्रसिद्ध बनारसी सिल्क साड़ियों सहित अन्य स्थानीय उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय संगीत और नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। कथक, लोकनृत्य और वाद्य-वृंद के माध्यम से जापानी प्रतिनिधिमंडल को काशी की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाएगा। जापानी प्रतिनिधिमंडल का काशी दौरा केवल निवेश और उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। गंगा की आध्यात्मिक धारा, सारनाथ की बौद्ध विरासत और काशी की कला एवं हस्तशिल्प परंपरा के माध्यम से भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते सहयोग की पृष्ठभूमि में यह दौरा दोनों क्षेत्रों के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कौशल विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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