वाराणसी , जुलाई 29 -- गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए काशी के पातालपुरी मठ में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। यहां मुस्लिम परिवारों के सदस्यों ने सनातनी परंपरा के अनुसार अपने गुरु की विधिवत आरती उतारी, चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया तथा कुछ लोगों ने गुरुदीक्षा भी ग्रहण की।
पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज से दीक्षा लेने के लिए आदिवासी समाज तथा मुस्लिम परिवारों के लोग भी पहुंचे। जाकिर पाण्डेय एवं अफरोज पाण्डेय के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के लोगों ने जगद्गुरु की विधिवत आरती उतारी और गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन किया। जगद्गुरु ने बिना किसी भेदभाव के सभी को आशीर्वाद प्रदान किया।
रामनगर निवासी अफरोज पाण्डेय ने बताया कि उनके पूर्वजों की जानकारी जुटाने पर पता चला कि उनका परिवार मूल रूप से पाण्डेय वंश से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के बारे में जानकारी मिलने और सनातन परंपरा के प्रति श्रद्धा के कारण उन्होंने अपने नाम के साथ 'पाण्डेय' उपनाम लगाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि इसे लेकर समाज में किसी प्रकार का विरोध नहीं है।
गाजीपुर निवासी जाकिर पाण्डेय ने बताया कि पूर्वजों के अभिलेखों की खोज में उन्हें जानकारी मिली कि उनका संबंध कश्यप गोत्र के ब्राह्मण परिवार से रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव पर गर्व है। वहीं मोहम्मद शहाबुद्दीन तिवारी ने कहा कि वे गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु की पूजा-अर्चना करने पहुंचे हैं।
रामपंथ के पंथाचार्य डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा धर्म और जाति के भेदभाव से परे है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और व्यवहार परिवर्तन के लिए गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है तथा रामानन्दी सम्प्रदाय के संत समाज में एकता और प्रेम का संदेश दे रहे हैं।
जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में किसी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके हजारों मुस्लिम शिष्य हैं, जिनके पूर्वज भी रामानन्दी सम्प्रदाय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति छुआछूत और भेदभाव को स्वीकार नहीं करती तथा रामपंथ में धर्म, जाति, भाषा और देश के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
इस अवसर पर दलित विचारक ज्ञान प्रकाश, आदिवासी समाज के धर्मगुरु द्वारिका प्रसाद तथा मुस्लिम समाज के सामाजिक नेता नौशाद अहमद दूबे ने जगद्गुरु बालक देवाचार्य का रामनामी दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया।
कार्यक्रम में प्रभु रामदास, जगदीश्वर दास, डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डॉ. मृदुला जायसवाल, कलीम, लियाकत, गुलाब अली, आफताब आलम, सलीम अंसारी, अब्दुल्ला दूबे सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित रहे।
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