वाराणसी , अप्रैल 20 -- धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की तपोभूमि श्रीधर्मसंघ, मणि मन्दिर (दुर्गाकुण्ड) में सोमवार को एक साथ 1100 बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र यज्ञोपवीत धारण किया।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर प्रत्येक वर्ष की भाँति इस बार भी धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज के पावन सानिध्य में बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार पूर्ण किया गया।
यज्ञोपवीत संस्कार के निमित्त प्रातःकाल से ही धर्मसंघ प्रांगण में विविध आयोजन प्रारम्भ हो गए थे। सबसे पहले मुख्य यजमान एवं बटुकों द्वारा संकल्प लिया गया। तत्पश्चात सविधि पंचांग पूजन किया गया। इसके उपरांत बटुकों का स्नानादि तथा छौरकर्म कराया गया। इसके बाद पीले वस्त्रों में बटुकों ने सम्पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज के साथ यज्ञोपवीत धारण किया।
सभागार में बनी 101 वेदियों पर मुख्य आचार्य पंडित शिवपूजन पाण्डेय तथा सह-आचार्य पंडित रामानन्द पाण्डेय के आचार्यत्व में 111 सह-आचार्यों ने बटुकों से सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण कराई। बटुकों ने परिजनों से भिक्षा माँगकर रिवाज निभाया। इस मौके पर बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाएँ लोकाचार के मंगल गीत गाती रहीं।
कार्यक्रम संयोजक तथा धर्मसंघ के महामंत्री पंडित जगजीतन पाण्डेय ने बताया कि ब्राह्मणों में यज्ञोपवीत संस्कार के बाद ही वेदाध्ययन का प्रावधान है। इसलिए शिक्षारम्भ से पूर्व उन्हें यज्ञोपवीत कराना अनिवार्य है, अन्यथा वे वेद अध्ययन के अधिकारी नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत की पवित्रता ही ब्रह्म को पूर्णता प्रदान करती है। इस अवसर पर शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने भी बटुकों को आशीर्वाद दिया। मुख्य यजमान रामप्रकाश दुबे ने अन्य अनुष्ठान भी संपन्न कराए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित