वाराणसी , फरवरी 28 -- धार्मिक नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के ठीक अगले दिन शनिवार को महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली खेली गई। जलती चिताओं के बीच जमकर अबीर-गुलाल उड़े और भस्म से होली की गई। पूरा श्मशान घाट डमरूओं और हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा।
इस अनोखे उत्सव को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। घाट पर चल रहे निर्माण कार्यों और उमड़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। विश्वनाथ धाम, ललिता घाट और आसपास की गलियों में पुलिस बल तैनात किया गया था। केवल आयोजकों, साधु-संतों और मीडिया प्रतिनिधियों को ही होली स्थल तक जाने की अनुमति दी गई। आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों को रोका गया, जिससे कई लोग मायूस होकर लौट गए।
बाबा महाश्मशान नाथ मंदिर के व्यवस्थापक एवं आयोजक गुलशन कपूर ने बताया कि फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि पर मणिकर्णिका घाट पर यह परंपरा निभाई जाती है। दोपहर में मसाननाथ बाबा की आरती के बाद उन्हें भस्म अर्पित कर होली खेली जाती है। कई भक्त बाबा से मन्नतें मांगते हैं और उन्हें मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। आयोजक के अनुसार, यह दिव्य उत्सव बाबा की इच्छा से ही संपन्न होता है।
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