बेंगलुरु , अगस्त 12 -- तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने के खिलाफ गुरुवार को प्रस्तावित 'कर्नाटक बंद' को बड़ा झटका लगा है।

प्रमुख परिवहन संस्थाओं और कई कन्नड़ संगठनों ने इस बंद से दूर रहने का फैसला किया है। कार्यकर्ता वाटल नागराज हालांकि राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के अपने आह्वान पर अडिग हैं।

श्री नागराज की अगुवाई वाले 'फेडरेशन ऑफ कन्नड़ ऑर्गेनाइजेशंस' ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के उस निर्देश के विरोध में बंद बुलाया है, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है।

बंद को सफल बनाने में पारंपरिक रूप से मुख्य भूमिका निभाने वाले संगठनों की राय हालांकि बंटी नजर आ रही है।

बेंगलुरु महानगर सड़क परिवहन निगम (बीएमटीसी) और कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के कर्मचारी संगठनों ने बंद का समर्थन नहीं किया है। वहीं निजी बस संचालकों, ट्रांसपोर्टरों और ऑटो-रिक्शा संघों ने भी इस आह्वान से दूरी बना ली है। फेडरेशन ऑफ कन्नड़ ऑर्गेनाइजेशंस से जुड़े कई संगठनों ने भी पूर्ण बंद का समर्थन न करने का फैसला किया है, हालांकि उन्होंने श्री नागराज के विरोध प्रदर्शन को नैतिक समर्थन दिया है।

कर्नाटक रक्षण वेदिके के एक धड़े के प्रमुख प्रवीण शेट्टी ने कहा, "हम वाटल नागराज के संघर्ष का समर्थन करते हैं, लेकिन कल की परिस्थितियों में हम बंद का समर्थन करने की स्थिति में नहीं हैं।"प्रमुख परिवहन संगठनों के अलग रहने से प्रस्तावित बंद का असर काफी कम होने की संभावना है और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चालू रहने की उम्मीद है। रेहड़ी-पटरी वालों के भी अपनी दुकानें खुली रखने की उम्मीद है, जबकि सरकारी और निजी विद्यालय सामान्य रूप से चलेंगे।

किसान संगठन बंद के समर्थन में हालांकि खुलकर सामने आये हैं। रायथा हितरक्षण समिति और कुछ अन्य किसान संगठनों ने इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है।

रायथा हितरक्षण समिति की सुनंदा ने कहा, "हम हड़ताल का समर्थन करते हैं, क्योंकि कर्नाटक के साथ अन्याय हुआ है।"कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने कर्नाटक को 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 12,000 क्यूसेक कावेरी पानी छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके बाद यह बंद बुलाया गया। बुधवार सुबह से पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया है।

कर्नाटक सरकार ने पानी की इस मात्रा को छोड़ने का विरोध किया है। सरकार की दलील है कि राज्य में विशेष रूप से कावेरी बेसिन में कम बारिश हुई है और मौजूदा जल स्थिति इतने बड़े पैमाने पर पानी छोड़ने की इजाजत नहीं देती।

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