चेन्नई , अगस्त 26 -- तमिलनाडु सरकार ने सिंचाई के लिए एक सितंबर से 45 दिनों के लिए मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने की बुधवार की शाम को घोषणा की।

जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने एक बयान में बताया कि कावेरी के जलग्रहण क्षेत्रों में कम दक्षिण-पश्चिम मानसून बारिश के बावजूद, वर्तमान जल स्तर और डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई की जरूरतों के मद्देनजर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने किसानों की मांग स्वीकार करते हुए एक सितंबर से 45 दिनों के लिए बांध से पानी छोड़ने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उसी दिन मेट्टूर बांध के जलद्वार को औपचारिक रूप से खोलेंगे।

गौरतलब है कि बांध में वर्तमान जल स्तर 88.43 फीट है, जबकि सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का मानक 90 फीट है। पिछले कुछ दिनों में पानी की आवक को देखते हुए अगले एक या दो दिनों में इस स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है। स्टैनली जलाशय के नाम से भी जाना जाने वाला मेट्टूर बांध का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सिंचाई वर्ष 2026-27 की शुरुआत में इसमें केवल 41.223 अरब घन फीट (41.223 टीएमसी) पानी ही बचा था। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के जलाशयों से तमिलनाडु को उसके हिस्से का पानी न मिलने और बांध में कम से कम 10 अरब घन फीट का न्यूनतम भंडारण बनाये रखने की ज़रूरत के कारण, निर्धारित तिथि 12 जून को सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका था।

डेल्टा जिलों के लोगों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हालांकि पानी छोड़ा गया था। भले ही डेल्टा में सिंचाई के लिए लगातार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा सकी, लेकिन आवश्यक पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए मेट्टूर से पानी की आपूर्ति जारी रखी गयी।

सरकार ने कहा कि उसने कावेरी जल में तमिलनाडु का कानूनी अधिकार हासिल करने के लिए प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाये हैं।

कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की बैठकों में उचित प्रतिनिधित्व किया गया तथा आवश्यक कदम उठाये गये। साथ ही उच्चतम न्यायालय में कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ायी गयी।

सिंचाई मंत्री ने कहा कि इन निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न चरणों में अनुकूल आदेश प्राप्त हुए, जिनमें कर्नाटक को तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा पर बिलिगुंडुलु में 3,500, 9,000 और 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश दिये गये। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूआरसी के इन आदेशों को सीडब्ल्यूएमए के बरकरार रखे जाने से कावेरी विवाद पर तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा हुई है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार आनुपातिक आधार पर पानी हासिल करने के लिए सीडब्ल्यूआरसी, सीडब्ल्यूएमए और शीर्ष अदालत में लगातार कदम उठा रही है और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है।

मेट्टूर में जल स्तर में लगातार सुधार, पानी की प्रत्याशित आवक और आगामी उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश के मद्देनजर तथा डेल्टा जिलों के किसानों की पेयजल एवं सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने बांध से पानी छोड़ने का निर्णय लिया है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को कावेरी डेल्टा जिलों में खेती के लिए तुरंत सिंचाई कार्य शुरू करने, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने, कम और मध्यम अवधि की धान की किस्मों सहित उपयुक्त फसल किस्मों का चयन करने के निर्देश दिये गये हैं। इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और अन्य कृषि इनपुट का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने को कहा गया है। किसानों से आग्रह किया गया है कि वे कृषि विभाग के अधिकारियों के परामर्श से उपलब्ध पानी का विवेकपूर्ण और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग करें। जिला कलेक्टरों, जल संसाधन अधिकारियों और कृषि अधिकारियों को आपस में तालमेल बनाकर काम करने का निर्देश दिया गया है, ताकि नियंत्रित सिंचाई के जरिये अंतिम छोर के खेतों तक पानी पहुंचे और पानी की हर बूंद से अधिकतम सिंचाई लाभ और फसल उपज प्राप्त हो सके।

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