नयी दिल्ली , अगस्त 25 -- केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को कहा कि कालिदास की रचनाओं में स्त्री केवल सौंदर्य का विषय नहीं है बल्कि महाकवि ने अपनी विभिन्न रचनाओं में स्त्री पात्रों के माध्यम से नारी को चेतना, गरिमा, प्रेम आदि के प्रतीक के रूम में स्थापित किया है।

श्री शेखावत ने आज यहां इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि प्रभाग के समवेत सभागार में आयोजित लेखक युगल जोशी की पुस्तक 'कहो कालिदास!' का लोकार्पण एवं पुस्तक परिचर्चा कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा , "मनुष्य के जीवन के साथ जो बात शाश्वत रूप से जुड़ी है, जो मनुष्य को मनुष्य बनाती है, वह है कल्पना। यह केवल पुस्तक के विमोचन का अवसर नहीं है, बल्कि हम सब का यहां एकत्र होना कालिदास के उस ऐतिहासिक मौन को स्वर देना है, जो सदियों से उनके व्यक्तित्व और जीवन के अनजाने पक्षों के इर्द-गिर्द पसरा हुआ है। कालिदास की रचनाओं में स्त्री केवल सौंदर्य का विषय नहीं है। महाकवि ने अपनी विभिन्न रचनाओं में स्त्री पात्रों के माध्यम से नारी को चेतना, गरिमा, प्रेम आदि के प्रतीक के रूम में स्थापित किया है।"उन्होंने कहा कि साहित्य, कला और संस्कृति के सृजनकर्ता अपनी रचनात्मकता के माध्यम से समाज को प्रेरित करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर का निर्माण करते हैं। 'कहो कालिदास!' शीर्षक अपने आप में एक आत्मीय पुकार है, जो वर्तमान समय से कालिदास के साथ संवाद स्थापित करती है। पुस्तक में कालिदास के जीवन, उनकी रचनाओं, प्रेम, विरह, उत्तरदायित्व, प्रकृति और विशेष रूप से उनके स्त्री पात्रों के विविध आयामों को नए दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया गया है।

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