पंचकूला , अगस्त 07 -- हरियाणा सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 (पॉश अधिनियम) के प्रभावी क्रियान्वयन और एसएचई-बॉक्स पोर्टल के व्यापक उपयोग पर जोर दिया है।

इसके तहत आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को बताया गया कि घरेलू कामगारों सहित असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाएं भी अपने नियोक्ता के खिलाफ जिला स्तर की स्थानीय शिकायत समिति में यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम में जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र (डीएचईडब्ल्यू) के अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, स्थानीय शिकायत समितियों की अध्यक्ष और विभिन्न जिलों के फील्ड अधिकारी शामिल हुए।

महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसर वाला कार्यस्थल उपलब्ध कराना सभी संस्थानों और संबंधित पक्षों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पॉश अधिनियम प्रभावी तभी होगा, जब उसका जमीनी स्तर पर सही तरीके से क्रियान्वयन, जागरूकता और संवेदनशीलता सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने जिला स्तर के अधिकारियों से शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत करने, महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने तथा शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग के कमल तथा पॉश विशेषज्ञ अंकुर ने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, आंतरिक समिति एवं स्थानीय शिकायत समिति के गठन, जांच प्रक्रिया, नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों और कानूनी अनुपालन संबंधी विषयों पर जानकारी दी।

अधिकारियों को एसएचई-बॉक्स पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और उसकी निगरानी की प्रक्रिया का भी प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम में दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 तथा घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 पर भी चर्चा की गई। समापन अवसर पर डॉ. प्रियंका सोनी ने अधिकारियों से अपने-अपने जिलों में महिलाओं की सुरक्षा, जागरूकता और शिकायत निवारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

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