नयी दिल्ली , फरवरी 21 -- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने परिवर्तन के लिए सरकार-उद्योग-समाज के समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कॉर्पोरेट जगत से लाभ को उद्देश्य के साथ जोड़ने का आग्रह किया और हर व्यक्ति का आह्वान किया कि बदलाव का वह जो भी संकल्प ले उसे पूरा किया जाना जरूरी है।
श्री राधाकृष्णन ने शनिवार को भारत मंडपम में एक राष्ट्रीय समाचारपत्र समूह की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित किया। परिवर्तन के लिए सरकार-उद्योग-समाज के समन्वय को आवश्यक बताते हुए उन्होंने सबका सीएसआर को 'राष्ट्र निर्माण की पूंजी' बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वह कॉर्पोरेट जगत से लाभ को उद्देश्य के साथ जोड़ने का आग्रह कर कहना चाहते हैं कि "जब आप कोई संकल्प लेते हैं, तो उसे पूरा अवश्य करें।"उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो समाज और राष्ट्र सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं और देश के इस परिवर्तनकारी दौर में ऐसा सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक दशक में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विश्व की दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। देश में संरचनात्मक सुधार, समावेशी विस्तार, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय समावेशन और अवसंरचना विकास के जरिए 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला गया है और सभी क्षेत्रों और समुदायों में आकांक्षाओं को बढ़ाया है।
विकास के अगले चरण में सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच गहन साझेदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व अब हाशिए पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रगति के केंद्र में है। उन्होंने सीएसआर को उस क्षेत्र के रूप में वर्णित किया जहां उद्यम और सहानुभूति आपस में मिलते है, जहां वित्तीय विवरण मानवीय कहानियों से जुड़ते हैं और जहां विकास को एक उद्देश्य मिलता है।
श्री राधाकृष्णन ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर देते हुए कहा कि विकास व्यापक होना चाहिए, समृद्धि समावेशी होनी चाहिए और सतत विकास अनिवार्य है। सीएसआर सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करके, दूरस्थ क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाकर, उद्योग-अनुकूल कौशल विकास को बढ़ावा देकर, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों का समर्थन करके और नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की पहलों के माध्यम से हरित परिवर्तन को गति देकर एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सीएसआर केवल कानून का पालन करना ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता है। ईमानदार करदाता सबसे अधिक देशभक्त नागरिक है और जब भारतीय कॉर्पोरेट जगत समुदायों, स्थिरता, युवाओं और नवाचार में निवेश करता है तो इससे सामाजिक पूंजी का निर्माण होता है जिससे दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित होता है। उन्होंने व्यापार सुगमता, डिजिटल शासन और जीएसटी जैसे नीतिगत सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि इन उपायों से व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता मजबूत हुई है। उनका कहना था कि सिर्फ नीतियों से ही किसी राष्ट्र का परिवर्तन नहीं हो सकता; परिवर्तन तभी होता है जब सरकार, उद्योग और नागरिक समाज एक साथ मिलकर काम करते हैं - यही इस शिखर सम्मेलन का मूल भाव है।
उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन से राज्यों और क्षेत्रों में नई प्रतिबद्धताएं और अनुकरणीय मॉडल सामने आएंगे। उन्होंने कॉर्पोरेट दिग्गजों से आग्रह किया कि वे साहसिक रूप से सोचें, रणनीतिक रूप से निवेश करें, प्रभाव का कड़ाई से आकलन करें और सीएसआर को व्यय के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण पूंजी के रूप में देखें।
उन्होंने मीडिया संगठनों से विकास संबंधी खबरों को अधिक स्थान देने का आह्वान करते हुए कहा कि एक सुचारू रूप से चलने वाले लोकतंत्र में जनता को केंद्र में रखना चाहिए और प्रगति की सकारात्मक कहानियों के माध्यम से व्यवस्था में उनका विश्वास मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने जनभागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में चुनावी प्रक्रियाओं के महत्व पर जोर दिया और यह विचार साझा किया कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा को लागू करने से बेहतर निर्णय लेने और दीर्घकालिक नीतिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
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