रायपुर , अगस्त 10 -- कामिका एकादशी के अवसर पर रविवार रात छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भगवान का आकर्षक श्रृंगार, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के आयोजन हुए। बिलासपुर, राजनांदगांव, रायपुर और दुर्ग में देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। कई मंदिरों में भगवान के विशेष श्रृंगार और झांकियों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

बिलासपुर में कामिका एकादशी पर शहर के मंदिरों में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान हुए। घोंघा बाबा मंदिर में खाटू श्याम का 51 किलो कमल और गुलाब के फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। फूलों से सजे श्याम दरबार की आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। शाम से ही मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। रात में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। देर रात तक खाटू श्याम के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही।

कामिका एकादशी के अवसर पर व्यंकटेश मंदिर, हरदेव लाल मंदिर, पीतांबरा पीठ और श्रीराम मंदिर सहित शहर के अन्य मंदिरों में भी भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान की आराधना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

राजनांदगांव में कामिका एकादशी पर शहर के श्री राम दरबार मंदिर में भगवान श्री श्याम का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर में धार्मिक आयोजन के साथ भजन-कीर्तन का कार्यक्रम देर रात तक चला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भजनों में शामिल होकर भगवान के दर्शन किए। भजन कार्यक्रम के समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

राजधानी रायपुर में भी कामिका एकादशी को लेकर श्याम भक्तों में खासा उत्साह रहा। समता कालोनी स्थित श्याम मंदिर में भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और भजन निशा का आयोजन हुआ। रात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। देर रात तक भक्तों का ऐसा तांता लगा रहा कि मंदिर तक जाने वाली सड़क पर भीड़ के चलते जगह नहीं बची। श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी के कारण कुछ घंटों के लिए आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था भी चरमरा गई। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में देर रात तक धार्मिक माहौल बना रहा।

इसी तरह दुर्ग शहर के कादम्बरी क्षेत्र में स्थित श्याम मंदिर में भी कामिका एकादशी के अवसर पर धार्मिक आयोजन किए गए। मंदिर में भगवान का विशेष पूजन और श्रृंगार किया गया। श्याम भक्तों ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की और धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

हिंदू पंचांग के अनुसार कामिका एकादशी सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से पापों का क्षय होता है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ तुलसी दल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण, भजन-कीर्तन तथा धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। कई श्रद्धालु एकादशी के अवसर पर मंदिरों में जाकर भगवान के दर्शन करते हैं और जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी करते हैं।

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