कानपुर नगर , सितंबर 10 -- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना दुर्घटना में अपनों को खोने वाले कृषक परिवारों के लिए आर्थिक संबल बन रही है। कानपुर नगर में वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 509 दावों के सापेक्ष 23 करोड़ 84 लाख 40 हजार रुपये की सहायता पात्र लाभार्थियों एवं मृतकों के आश्रितों के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 341 दावों के सापेक्ष 16 करोड़ 56 लाख 90 हजार रुपये का भुगतान किया गया, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 168 दावों के सापेक्ष सात करोड़ 27 लाख 50 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को कहा कि शासन की नीति के अनुरूप योजना का लाभ प्रत्येक पात्र कृषक परिवार तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। किसी पात्र परिवार अथवा आश्रित को केवल तकनीकी अथवा अपूर्ण तथ्यों के आधार पर योजना के लाभ से वंचित न किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर प्रकरण की पुनः जांच कर राजस्व अभिलेखों के साथ वास्तविक कृषि कार्य और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पात्रता निर्धारित की जाए।
घाटमपुर के कुंवाखेड़ा गांव निवासी रामसिंह की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। वह कृषि कार्य के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे और राजस्व अभिलेखों में कृषि भूमि के सहखातेदार भी दर्ज थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गंभीर चोट लगने के कारण कोमा में जाने का उल्लेख था। ग्रामवासियों के बयान और पंचनामा में भी गंभीर चोटों के कारण मृत्यु की बात सामने आई।
प्रकरण के पुनः परीक्षण में इन साक्ष्यों के आधार पर रामसिंह की मृत्यु दुर्घटनाजनित होना स्थापित हुआ। जिला स्तरीय समिति ने उन्हें योजना में निर्धारित कृषक की श्रेणी में माना। इसके आधार पर उनकी पत्नी तारापती का दावा पात्र मानते हुए योजना का लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
नर्वल तहसील के कनवांपुर, तिलसहरी खुर्द निवासी सुरेंद्र कुमार पाल की कृषि कार्य करते समय दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी नेहा देवी ने योजना के तहत आर्थिक सहायता का दावा किया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज 'शराब की गंध' के आधार पर उनका दावा पूर्व में अस्वीकार कर दिया गया था।
प्रकरण के पुनः परीक्षण में सामने आया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के रक्त में एल्कोहल की मात्रा विधिक अथवा चिकित्सकीय रूप से निषिद्ध सीमा से अधिक होने का कोई उल्लेख नहीं था। किसी रासायनिक अथवा फोरेंसिक रिपोर्ट से भी यह प्रमाणित नहीं था कि दुर्घटना नशे के कारण हुई थी। जिला स्तरीय समिति ने माना कि केवल 'शराब की गंध' के उल्लेख के आधार पर कृषक परिवार को लोक कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बाद नेहा देवी का दावा पात्र मानते हुए आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
घाटमपुर तहसील के कोटरा गांव के एक प्रकरण में कृषि भूमि मृतक के नाम दर्ज नहीं थी, बल्कि उसके पिता जगदीश राजस्व अभिलेखों में 1.1060 हेक्टेयर कृषि भूमि के सहखातेदार थे। पिता के अस्वस्थ रहने के कारण खेती की जिम्मेदारी बेटा संभाल रहा था। वह स्वयं खेत में कृषि कार्य करता और इसी से परिवार का भरण-पोषण करता था।
दुर्घटना में बेटे की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी भूरी ने योजना के तहत आर्थिक सहायता का दावा किया। पुनः जांच में एसडीएम घाटमपुर की आख्या और ग्रामवासियों के बयानों से पुष्टि हुई कि पिता के अस्वस्थ रहने के कारण परिवार की खेती वास्तव में मृतक ही संभाल रहा था। जिला स्तरीय समिति ने माना कि भूमि उसके नाम दर्ज न होने के बावजूद वह कृषक परिवार का सदस्य होने के साथ वास्तविक रूप से कृषि कार्य करता था। इसके आधार पर भूरी का दावा पात्र मानते हुए योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया।
घाटमपुर के कटरी गांव के एक प्रकरण में मृतक अपने पिता रामबाबू के नाम दर्ज कृषि भूमि पर खेती करता था। इसके साथ ही उसने गांव के एक अन्य व्यक्ति की 0.4400 हेक्टेयर कृषि भूमि बटाई पर लेकर भी खेती की थी। ग्राम प्रधान के प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेखों से बटाई पर भूमि लेकर वास्तविक रूप से कृषि कार्य करने की पुष्टि हुई। जिला स्तरीय समिति ने माना कि मृतक कृषक परिवार का सदस्य होने के साथ स्वयं भी बटाई पर भूमि लेकर खेती करता था और योजना में निर्धारित कृषक की परिभाषा के अंतर्गत आता था। इसके आधार पर रामबाबू द्वारा प्रस्तुत दावा पात्र मानते हुए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया।
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