अमरोहा , जुलाई 15 -- उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में कांवड़ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने के बीच प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण, बदहाल सड़कों और जलभराव की समस्या को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और शिवभक्तों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कई मार्गों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ और पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव ने बुधवार को विभिन्न कांवड़ मार्गों का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को शेष कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर युद्धस्तर पर पूरा करने तथा लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

पुलिस प्रशासन के अनुसार कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और आवश्यकतानुसार रूट डायवर्जन की व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बदायूं-बिल्सी-गजरौला स्टेट हाईवे-51 पर अनेक स्थानों पर फुटपाथ अब भी अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिससे कांवड़ यात्रियों और आम वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मंडी धनौरा क्षेत्र में चांदपुर रोड से कलाली मार्ग तक सड़क जर्जर स्थिति में है। मार्ग पर कई स्थानों पर जलभराव, सड़क किनारे फैला कूड़ा-कचरा तथा झाड़ियों के कारण पैदल चलने में भी कठिनाई हो रही है। उनका कहना है कि इस मार्ग का उपयोग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में हरिद्वार जाने वाले कांवड़िए भी करते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस संबंध में उपजिलाधिकारी, नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग तथा क्षेत्रीय विधायक राजीव तरारा को कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। अधिवक्ता अनुराग सिंह ने कहा कि किसी भी संवेदनशील प्रशासन की पहचान दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने से नहीं, बल्कि समय रहते प्रभावी रोकथाम और जनसुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने से होती है।

स्थानीय नागरिकों और शिवभक्तों ने जिला प्रशासन से मुख्य कांवड़ मार्गों के साथ-साथ संपर्क मार्गों तथा स्टेट हाईवे-51 के फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने, सड़क मरम्मत, जलनिकासी और साफ-सफाई के कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की है, ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा या दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

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