प्रयागराज , अगस्त 14 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सावन माह के दौरान कांवड़ यात्रा मार्ग पर चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने संबंधी नोटिस के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश चीफ जस्टिस अरुण भंसाली एवं जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने पारित किया।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता हैं और उन्होंने यह याचिका जनहित के बजाय ''पब्लिसिटी इंटरेस्ट'' में दायर की है। यह जनहित याचिका अमरोहा निवासी अधिवक्ता नासिर फारूक की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें सावन माह के दौरान चिकन एवं मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध किया।
याचिका में कहा गया था कि अमरोहा में कांवड़ मार्ग से हटकर स्थित चिकन की दुकानों को भी पुलिस द्वारा बिना तिथि वाले नोटिस जारी कर बंद करा दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद ने न्यायालय से हस्तक्षेप करते हुए ऐसे नोटिसों को निरस्त करने की मांग की थी।
याचिका में यह भी कहा गया था कि नोटिस में केवल सावन के चार सोमवार का उल्लेख है, जबकि पूरे सावन माह के दौरान चिकन और मटन की दुकानों को नहीं खुलने दिया जा रहा है। साथ ही कांवड़ मार्ग से दूर स्थित दुकानों को भी बंद कराए जाने का आरोप लगाया गया था, जिससे संबंधित व्यवसायियों के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है।
हालांकि, मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया और इसे जनहित के बजाय प्रचार-प्रसार की मंशा से दायर याचिका माना।
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