भदोही , जुलाई 7 -- उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में पवित्र श्रावण मास की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। श्रद्धालु जिले के प्रमुख शिव मंदिरों की साफ-सफाई व रंग रौशन के कार्य में जुट गए हैं। मान्यता है कि श्रावण मास में शिव भक्ति से तमाम सांसारिक दुःखों से मुक्ति मिलती है।
काशी-प्रयाग व विंध्य क्षेत्र के मध्य स्थित भदोही जिले के शिवालयों का एतिहासिक व पौराणिक महत्व है। प्रयागराज से काशी विश्वनाथ व बैजनाथ धाम को जलाभिषेक के लिए जाने वाले शिव भक्त कांवरियं भदोही के पवित्र शिव मंदिरों में मत्था टेकने के बाद ही आगे बढ़ते हैं। शिवालयों में भारी तादाद में कांवरियों के पहुंचने की संभावनाओं को देखते हुए श्रद्धालु शिवालयों की साज-सज्जा व रंग रौशन के कार्य में जुट गए हैं। शिव भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसे दृष्टिगत रखते हुए मंदिर समितियों व प्रशासनिक स्तर से तैयारियों का सिलसिला तेज हो गया है। शिव भक्तों की सुरक्षा के मद्देनजर नेशनल हाईवे के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती देखी जा सकेगी।
शिव साधना में लीन पंडित मिथिलेश उपाध्याय ने बताया कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पवित्र और पूण्यदायी समय माना जाता है। इस मास का मूल संदेश केवल बाहरी पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि, संयम, तप, करुणा और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण है। शिव भक्ति का वास्तविक रहस्य मनुष्य के भीतर उपस्थित काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों का त्याग कर शिवतत्त्व को अपने जीवन में धारण करना है।
स्कंद पुराण सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय बताया गया है। इस मास में व्रत, जप, अभिषेक और रुद्रपाठ का विशेष महत्व माना गया है। वर्षा ऋतु के इस पवित्र महीने में प्रकृति के नवजीवन के साथ मनुष्य भी अपने जीवन में आध्यात्मिक नवचेतना का अनुभव कर सकता है।
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