रायपुर/बिलासपुर , जुलाई 06 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में दायर एक महत्वपूर्ण आवेदन को खारिज कर दिया है।

यह जानकारी अधिवक्ता देवाशीष तिवारी ने दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए विवादित बिंदुओं पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को निर्धारित की गई है।

यह चुनाव याचिका पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की विभिन्न धाराओं के तहत दायर की है। याचिका में देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि चुनावी शपथपत्र में सोशल मीडिया खातों, आय, संपत्ति तथा लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित आवश्यक जानकारियां पूरी तरह उजागर नहीं की गईं।

मामले में देवेंद्र यादव की ओर से अधिवक्ताओं ने आवेदन प्रस्तुत कर आग्रह किया था कि अदालत अगस्त 2024 में निर्धारित मुद्दा क्रमांक दो और चार को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में लेकर पहले उनका निस्तारण करे। उनका तर्क था कि नामांकन पत्र और शपथपत्र में सभी आवश्यक विवरण प्रस्तुत किए जा चुके हैं, इसलिए इन बिंदुओं पर साक्ष्य दर्ज किए बिना भी निर्णय दिया जा सकता है।

वहीं, प्रेम प्रकाश पांडे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एन. के. शुक्ला और अधिवक्ता देवाशीष तिवारी ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि विवादित प्रश्न तथ्यात्मक प्रकृति के हैं और प्रतिवादी ने उनका खंडन किया है। ऐसे में साक्ष्यों एवं गवाहों की जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं होगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक मुद्दों पर अलग से फैसला सुनाने की मांग अस्वीकार कर दी। अदालत ने कहा कि मामले का समुचित निराकरण पूर्ण ट्रायल के बाद ही संभव है, जब सभी साक्ष्यों और गवाहों का परीक्षण कर लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले देवेंद्र यादव की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को फरवरी 2026 में उच्चतम न्यायालय भी खारिज कर चुका है। इसके साथ ही उन्हें चुनाव याचिका का सामना करने के लिए उच्च न्यायालय में ही कार्यवाही जारी रखने के निर्देश दिए गए थे।

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