यमुनानगर , अक्टूबर 10 -- हरियाणा के कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने शनिवार को जगाधरी अनाज मंडी का दौरा कर धान खरीद व्यवस्था की बदहाली को लेकर नायब सैनी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी में धान सड़क और डिवाइडर पर पड़ा है जबकि सरकार महज 30 गाड़ियों का एहसान जता रही है। किसानों ने दो दिन का अल्टीमेटम दिया है।
श्री सुरजेवाला ने कहा कि जगाधरी मंडी में धान अब सड़क के डिवाइडर पर रखा जा रहा है। मजदूर सड़क पर ही धान सुखा रहे हैं और हजारों कट्टे खुले आसमान के नीचे पड़े हैं। किसान और आढ़ती घंटों इंतजार के बाद मंडी कमेटी के दफ्तर पर ताला लगाने को मजबूर हुए। चार घंटे तक कर्मचारी अंदर रहे, इसके बाद अधिकारी आए और 30 गाड़ियां लगाने की बात कही। किसानों ने स्पष्ट कहा कि रोज कम से कम 60 गाड़ियों की जरूरत है। जिस मंडी को 60 गाड़ियों की जरूरत है, वहां सरकार 30 का एहसान जता रही है।
उन्होंने कहा कि यमुनानगर जिले में अब तक एक लाख 12 हजार टन धान की आवक हुई है, इसमें से 66 हजार टन की खरीद हुई है, लेकिन उठान महज सात हजार टन ही हो सका है। यानी खरीदे गए हर 10 कट्टों में से नौ अभी भी मंडी में पड़े हैं। जिले की व्यासपुर मंडी में किसानों ने दोनों गेट बंद कर दिए हैं, क्योंकि हफ्ते भर से खरीदा धान नहीं उठाया गया। बारिश से पहले ही करीब 33 हजार टन धान भीग चुका है और अब हल्की बारिश होते ही किसान तिरपाल लेकर दौड़ने को मजबूर हैं।
सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री सैनी से सवाल किया कि तेज बारिश होने पर फसल का जिम्मेदार कौन होगा? यह स्थिति तब है जब यमुनानगर प्रदेश के कृषि मंत्री का अपना जिला है।
उन्होंने कहा कि एक ही धान की नमी आढ़ती और मार्केट कमेटी की मशीनों में अलग-अलग बताई जा रही है, जिससे हर बार नुकसान किसान को हो रहा है। मुख्यमंत्री के वीडियो कॉन्फ्रेंस में 17 प्रतिशत नमी वाले धान की खरीद का निर्देश आया, लेकिन इससे पहले इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा था। नमी के नाम पर 250 रुपये प्रति क्विंटल तक कटौती की जा रही है। ड्रायर और सुखाने की जगह उपलब्ध नहीं है, तभी धान सड़क पर सूख रहा है। उन्होंने पूछा कि अगर कटौती लेकर 24 प्रतिशत नमी वाला धान खरीदा जा सकता है तो पूरे एमएसपी पर क्यों नहीं लिया जाता?श्री सुरजेवाला ने कहा कि भुगतान को लेकर भी गंभीर स्थिति है। प्रदेश में 1164 करोड़ रुपये का धान खरीदा गया, लेकिन किसानों के खातों में सिर्फ 199 करोड़ रुपये ही पहुंचे हैं। यमुनानगर में अब तक मात्र 75 किसानों को करीब सवा करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। हजारों किसानों का पैसा अटका हुआ है, जबकि त्योहार सिर पर हैं। खरीद शुरू होने के करीब 10 दिन बाद मिलर्स के साथ अनुबंध हुआ, जिसकी पुष्टि स्वयं एसडीएम ने भी की।
उन्होंने पराली जलाने पर 30 महीने तक पोर्टल और सरकारी खरीद बंद करने की धमकी का विरोध करते हुए कहा कि यह पराली का समाधान नहीं, बल्कि किसान को आर्थिक रूप से कमजोर करने जैसा है। इसी तरह कंबाइन हार्वेस्टर पर शाम छह बजे से सुबह 10 बजे तक पाबंदी लगाई गई है। उल्लंघन पर 30 हजार रुपये जुर्माना और राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री का प्रावधान है। उन्होंने सवाल किया कि खेत और फसल किसान की है, फिर कटाई का समय सरकार क्यों तय करेगी?भाजपा द्वारा प्रति एकड़ खरीद कोटा घटाकर 27.73 क्विंटल किए जाने पर भी विधायक ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पिछले साल 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक खरीद हुई थी। इस कटौती से हर एकड़ पर सवा सात क्विंटल धान एमएसपी से बाहर हो गया है, जिससे किसानों को करीब 17,700 रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है। गेहूं के एमएसपी में महज 25 रुपये की बढ़ोतरी को भी उन्होंने अपर्याप्त बताया।
कांग्रेस विधायक ने भाजपा सरकार से मांग की कि जगाधरी मंडी से रोज कम से कम 60 गाड़ियां लगाई जाएं, सड़क और डिवाइडर पर पड़े धान का तुरंत उठान हो, भीगे धान की भी एमएसपी पर खरीद की जाए, नमी कटौती बंद हो, ड्रायर की व्यवस्था हो और 72 घंटे में भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रति एकड़ कोटा समाप्त किया जाए तथा कंबाइन पर पाबंदी और जुर्माना वापस लिया जाए।
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