भीलवाड़ा , अगस्त 25 -- राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को धार देना शुरू कर दिया है।
इसी सिलसिले में कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक सीपी मीणा के भीलवाड़ा दौरे में हुई बैठक में पार्टी नेताओं ने जहां संगठन की कमजोरियों और टिकट वितरण की रणनीति पर मंथन किया, वहीं राज्य की भाजपा सरकार पर भी जमकर निशाना साधा।
सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि आगामी निकाय चुनाव में युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने पर जोर रहेगा।
पार्टी की ओर से पहली बार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की गयी है, जिसके जरिये टिकट के इच्छुक दावेदार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
कांग्रेस के भीतर इसे टिकट वितरण की प्रक्रिया को ज्यादा व्यापक और पारदर्शी बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने निकाय चुनाव में युवाओं को बड़ी हिस्सेदारी देने का संकेत दिया है। श्री मीणा ने कहा कि पार्टी की कोशिश है कि करीब 50 फीसदी तक युवाओं को चुनाव में अवसर मिले। पार्टी ऐसे युवा चेहरों को आगे लाने की तैयारी में है, जो संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ रखते हैं।
पूर्व मंत्री नसीम अख्तर ने कहा कि युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाना पार्टी की मंशा है। उन्होंने कहा कि करीब 50 फीसदी युवाओं को मौका देने के साथ पिछड़े वर्गों और अन्य सामाजिक वर्गों को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जायेगा। महिलाओं को भी टिकट वितरण में पर्याप्त अवसर देने की बात उन्होंने कही।
श्री अख्तर ने कहा कि इस बार पहली बार कांग्रेस ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनायी है। इससे टिकट के इच्छुक लोगों को अपनी दावेदारी रखने का सीधा अवसर मिला है और पार्टी के पास सभी आवेदनों का व्यवस्थित रिकॉर्ड भी उपलब्ध होगा।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामलाल जाट ने संगठन के भीतर की स्थिति को लेकर भी स्पष्ट बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन में जो भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर करने और कार्यकर्ताओं को मजबूती से जोड़ने के लिए सीपी मीणा आये हैं।
श्री जाट ने कहा कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी सुधार किये जायेंगे। पार्टी के भीतर किसी भी स्तर पर रही कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना प्राथमिकता होगी।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में 50 फीसदी और निकायों में 33 फीसदी महिला आरक्षण पहले से है। ऐसे में महिलाओं की भागीदारी चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगी।
कांग्रेस की कोशिश है कि निकाय चुनाव में ऐसे उम्मीदवार मैदान में आयें, जो जनता के बीच स्वीकार्य हों और ईमानदारी से काम करने की क्षमता रखते हों।
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