भुवनेश्वर , अक्टूबर 28 -- ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने मंगलवार को राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह कोरापुट जिले की कोटिया पंचायत के विकास को प्राथमिकता दे, वहां के निवासियों की गरिमा एवं आत्म-सम्मान की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ तथा आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्राप्त हों।

उन्होंने क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान में देरी के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली डबल-इंजन सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कोटिया के विकास के लिए एक अलग बजट की मांग की और संविधान के अनुच्छेद 371 का हवाला देते हुए आजीविका, अवसंरचना और मूलभूत सुविधाओं में विशेष निवेश करने का आग्रह किया। आज कोटिया क्षेत्र के कई गांवों के दौरे के दौरान, श्री दास ने वहां के निवासियों से बातचीत की और कल्याणकारी योजनाओं, पेंशन तथा सरकारी सेवाओं तक पहुंच से जुड़ी उनकी समस्याएं सुनीं।

उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार से आग्रह किया कि वह रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने एवं उनके हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए। यह क्षेत्र ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय विवाद के केंद्र में रहा है।

श्री दास ने कहा, "आप ओडिया पहचान और गौरव की बात करके सत्ता में आए थे। अब कोटिया के लोगों के आत्मसम्मान की रक्षा करें।"उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह अपने वादों को पूरा करे, ताकि वहां के निवासियों को वास्तविक लाभ मिल सके। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि लगातार कई सरकारों द्वारा की गई अनदेखी के कारण ही कोटिया के हालात आज ऐसे हो गए हैं।

श्री दास ने इस बात पर बल दिया कि निवासियों को जरूरी सुविधाओं और सहायता से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से ऐसे उपाय करने का आग्रह किया जो इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करें और यहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएं।

क्षेत्रीय मुद्दे को उठाते हुए, श्री दास ने आंध्र प्रदेश सरकार से कोटिया में पंचायत चुनाव तुरंत रोकने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि इस क्षेत्र में ओडिशा के पहले से ही निर्वाचित प्रतिनिधि मौजूद हैं, जिनमें एक सरपंच और एक जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश का इस क्षेत्र पर अपना दावा करने का कोई औचित्य नहीं है।

विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए श्री दास ने कहा कि 1936 में भाषाई आधार पर ओडिशा राज्य के गठन के समय से ही कोटिया इसका हिस्सा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश की स्थापना 1956 में हुई थी और आरोप लगाया कि इस क्षेत्र की मौजूदा स्थिति मुख्य रूप से वर्षों की उपेक्षा का परिणाम है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के दौरान, स्थानीय निवासियों ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश सरकारों द्वारा दी जाने वाली कल्याणकारी सुविधाओं एवं सार्वजनिक सेवाओं में अंतर को लेकर चिंता व्यक्त की।

ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें ओडिशा से 1,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलती है जबकि आंध्र प्रदेश से उन्हें 4,000 रुपये मिलते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा सरकार से राशन कार्ड मिलने से काफी पहले ही उन्हें आंध्र प्रदेश से राशन कार्ड मिल गए थे। निवासियों का यह भी आरोप है कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, ओडिशा से पेंशन का लाभ प्राप्त करना ज्यादा मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि अपने खातों में आए पैसे को निकालने के लिए उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को यह भी पता चला कि आंध्र प्रदेश के अधिकारी पिछले कई वर्षों से लगातार इस क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, जो कोटिया में अपना प्रभाव जमाने के लिए दोनों राज्यों के बीच चल रहे प्रशासनिक एवं राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है।

श्री दास के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम, कोरापुट के सांसद सप्तगिरी उलाका, जेपोर के विधायक तारा प्रसाद बाहिनीपति, लक्ष्मीपुर के विधायक पाबित्रा सौंटा, बिस्सम कटक के विधायक नीलमाधब हिकाका, चित्रकोंडा के विधायक मंगू खिल्ला और ओडिशा महिला कांग्रेस की अध्यक्ष मिनाक्षी बाहिनीपति सहित अन्य शामिल थे।

इस दौरे का मुख्य उद्देश्य निवासियों की शिकायतों को समझना, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में आ रहे अंतर की जांच करना और कोटिया में सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता को उजागर करना था। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण रेंज के डीआईजी अखिलेश सिंह, कोरापुट के जिला कलेक्टर मनोज सत्यवान महाजन और पुलिस अधीक्षक रोहित वर्मा से मुलाकात की ताकि उन्हें वहां की स्थिति की जानकारी दी जा सके और अपने निष्कर्ष साझा किए जा सकें।

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