जयपुर , फरवरी 23 -- राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने कहा है कि कांग्रेस की आपसी कलह को सुलझाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साेलहवीं विधानसभा के पंचम एवं बजट सत्र में सोमवार को सदन आये।

श्री बेढ़म ने विधानसभा परिसर में मीडिया से रूबरू होकर कांग्रेस पर यह तंज कसा। उन्होंने कहा कि श्री गहलोत का विधानसभा में आगमन हुआ, जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गत 21 फरवरी को सदन में राज्य सरकार के दो वर्षों के विकास कार्यों की तुलना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल से करने का मुद्दा उठाया।

उन्होंने इस महत्वपूर्ण बहस में कांग्रेस नेतृत्व की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया और यह माना जा रहा है कि कांग्रेस को इस प्रकार की बहस से बचना नहीं चाहिए था, क्योंकि इससे प्रदेशभर में पार्टी की छवि प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि यदि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने कार्यकाल में जनता के कल्याण, आधारभूत संरचना विकास, किसानों, युवाओं, महिलाओं एवं गरीबों के हित में ठोस कार्य किए होते, तो विपक्ष मजबूती से अपने पक्ष को सदन में रखता। इसके विपरीत, बहस से दूरी बनाना जनता के प्रति जवाबदेही से बचने जैसा प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही आंतरिक प्रतिस्पर्धा, विशेष रूप से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच, पार्टी की छवि को और प्रभावित कर रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा भी इस स्थिति को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि श्री गहलोत ने सदन में अपनी उपस्थिति के बावजूद कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की जबकि मीडिया के समक्ष दिए गए उनके वक्तव्य मर्यादा के अनुरूप नहीं थे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में जनकल्याण के लिए प्रभावी कार्य किए हैं और इसी आधार पर वह पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल से तुलना की बात कर रही है। साथ ही कांग्रेस नेतृत्व से अपेक्षा की गई है कि वह आंतरिक मतभेदों को समाप्त कर सकारात्मक राजनीति के माध्यम से प्रदेश की जनता के प्रति जवाबदेही निभाए।

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