किन्शासा/ब्राज़ाविल (वार्ता) कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के उत्तर-पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला बुंडिबुग्यो के प्रकोप की पुष्टि होने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) वहां की सरकार को दी जाने वाली सहायता को तेज़ी से बढ़ा रहा है।

कांगो की राजधानी किन्शासा में स्थित देश की रेफरेंस लैब, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोमेडिकल रिसर्च (आईएनआरबी) द्वारा किए गए लैब टेस्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि इटुरी प्रांत के मोंगबवालू और रवाम्पारा स्वास्थ्य क्षेत्रों में गंभीर बीमारी और मौतों के एक समूह से जुड़े संदिग्ध मामलों से लिए गए 13 नमूनों में से 8 में इबोला का प्रकोप बुंडिबुग्यो प्रजाति के कारण हुआ था। बुंडिबुग्यो प्रजाति की पहचान सबसे पहले 2007 में पश्चिमी युगांडा के बुंडिबुग्यो ज़िले में हुई थी, उस दौरान इसके 131 मामले सामने आए थे और 42 लोगों की मौत हुई थी। इसमेंं मृत्यु दर 32 प्रतिशत थी)।

कांगो में अब तक कुल 80 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनके बारे में संदेह है कि वे इबोला बुंडिबुग्यो के कारण हुई हैं। इस वायरस की चपेट में आने वाले लोगों में बुखार, पूरे शरीर में दर्द, कमज़ोरी, उल्टी और कुछ मामलों में रक्तस्राव जैसे लक्षण देखे गये हैं। कई मरीज़ों की हालत तेज़ी से बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। बीमारी की अनिश्चितताओं और गंभीरता को देखते हुए, प्रभावित समुदायों में इसके फैलने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है।

डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि और आपातकालीन तैयारी तथा प्रतिक्रिया टीम सहित डब्ल्यूएचओ का एक मिशन पहले ही इटुरी में तैनात किया जा चुका है, ताकि प्रांतीय अधिकारियों को उन जाँचों में सहायता दी जा सके जिनके परिणामस्वरूप दो क्षेत्रों में बीमारी फैलने की पुष्टि हुई। यह टीम राष्ट्रीय और प्रांतीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर बीमारी को नियंत्रित करने के उपायों को मज़बूत करने और वायरस को और फैलने से रोकने के लिए भी काम कर रही है। राष्ट्रीय अधिकारियों ने आपातकालीन समन्वय तंत्र को सक्रिय कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त बहु-विषयक त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैनात किया है।

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