कांकेर , दिसंबर 24 -- राष्ट्रीय पेसा दिवस के अवसर पर कांकेर जिले में बुधवारा को आदिवासी समाज ने विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम आदिवासी समाज को शोषणमुक्त, भयमुक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें पेसा कानून की भावना और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।
आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज के अधिकारों, स्वशासन और ग्रामसभा की भूमिका को सशक्त करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन पांच दिवसीय कोया पुनेम सैद्धांतिक प्रशिक्षण शिविर के अंतर्गत किया गया, जिसमें आज राष्ट्रीय पेसा दिवस विशेष रूप से मनाया गया।
शिविर में आदिवासी समाज के वरिष्ठ सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान पेसा कानून के प्रावधानों, परंपरागत व्यवस्थाओं और आदिवासी संस्कृति की रक्षा पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर भी शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पेसा कानून आदिवासी समाज को संवैधानिक अधिकार प्रदान करता है और इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वशासन को मजबूत करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आदिवासी समाज की उचित और न्यायसंगत मांगों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा तथा प्रशासन ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने के लिए सतत प्रयास करेगा।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन और समाज के बीच समन्वय से ही पेसा कानून का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। आयोजन के अंत में पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक संकल्प लिया।
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