कांकेर , मई 05 -- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ तहसील अंतर्गत तुमसनार पंचायत के आश्रित ग्राम राजपुर के ऊपरपारा में आज भी ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका है। हालात यह हैं कि करीब 100-120 की आबादी वाले इस गांव में लोग गड्ढों से रिसने वाला दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट लगातार गहराता जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव में न तो हैंडपंप की सुविधा है और न ही नल-जल योजना लागू हो पाई है। जल स्रोत के अभाव में ग्रामीण नाले के किनारे गड्ढे खोदकर पानी एकत्र करते हैं। यह पानी कीचड़, कचरे और जानवरों की गंदगी से प्रभावित रहता है, बावजूद इसके ग्रामीण इसी पानी का उपयोग पीने और घरेलू कार्यों में कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी का रंग और गंध बेहद खराब होता है लेकिन मजबूरी में उन्हें यही पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
दूषित पानी के उपयोग से गांव में उल्टी-दस्त, डायरिया, पीलिया, त्वचा रोग और कुपोषण जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे इसकी चपेट में हैं।महिलाओं में एनीमिया और कमजोरी बढ़ रही है, वहीं बच्चों में डायरिया और कुपोषण आम हो गया है। कई बच्चे बीमारियों के कारण स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं।
हर सुबह गांव की महिलाएं और बच्चे पानी के लिए बर्तन लेकर निकलते हैं और घंटों इंतजार के बाद गड्ढों से रिसने वाला पानी भरते हैं, जिससे उनकी दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में नाले का गंदा पानी गड्ढों में भर जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। इससे संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पानी की टंकी का निर्माण तो किया गया है लेकिन अब तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। हैरानी की बात यह है कि गांव में एक भी हैंडपंप स्थापित नहीं किया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन से शिकायत की लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं।
सरकार की 'हर घर जल' योजना के दावों के बीच राजपुर जैसे गांवों की स्थिति जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।
राजपुर गांव का जल संकट अब केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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