बड़वानी , सितंबर 16 -- मध्यप्रदेश में बड़वानी जिले के निवाली कस्बे के बाहरी क्षेत्र स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की 200 से अधिक छात्राओं ने मंगलवार शाम मूलभूत सुविधाओं की कथित कमी और अव्यवस्थाओं की शिकायतों को लेकर कलेक्टर से मिलने के लिए जिला मुख्यालय की ओर पैदल मार्च किया। छात्राओं के विरोध के बाद छात्रावास अधीक्षक और सहायक वार्डन को उनके पदों से हटा दिया गया। पुलिस ने छात्राओं को कथित रूप से उकसाने और सड़क पर चक्काजाम कराने के आरोप में करीब एक दर्जन नामजद तथा कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।

अधिकारियों के अनुसार बड़वानी से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित छात्रावास की छात्राएं अधीक्षक सविता बारिया और सहायक वार्डन साधना साहू को कथित अव्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार बताते हुए उन्हें हटाने की मांग कर रही थीं। छात्राएं अपनी समस्याओं से कलेक्टर को अवगत कराने के लिए जिला मुख्यालय जाना चाहती थीं।

अधिकारियों ने छात्राओं को छात्रावास में रोककर उनकी समस्याएं सुनने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के वहां पहुंचने की बात कही थी। हालांकि, पुलिस सूत्रों के अनुसार आदिवासी संगठनों से जुड़े कुछ लोगों द्वारा छात्राओं को कथित रूप से उकसाए जाने के बाद वे पैदल मार्च पर निकल गईं।

करीब पांच किलोमीटर पैदल चलने के बाद छात्राओं को रोक लिया गया। कलेक्टर के निर्देश पर सर्व शिक्षा अभियान की जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) सोनालिका अचाले, पानसेमल एसडीएम रमेश सिसोदिया, राजपुर एसडीओपी बीएल आटोदे सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्राओं से चर्चा की।

छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखा और करीब आधी रात तक सड़क पर चक्काजाम किया। इस दौरान डीपीसी ने छात्रावास अधीक्षक और सहायक वार्डन को हटाने की घोषणा की। जांच पूरी होने तक नायब तहसीलदार अर्चना ग्रेवाल को छात्रावास का प्रभार सौंपा गया।

डीपीसी अचाले ने बताया कि छात्राओं द्वारा की गई शिकायतों की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बाद में प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई छह बसों से छात्राओं को वापस छात्रावास पहुंचाया गया।

निवाली थाना प्रभारी वीर सिंह चौहान ने बताया कि छात्रावास अधीक्षक की शिकायत पर करीब एक दर्जन नामजद लोगों, जिनमें दीपक निगवाल भी शामिल है, तथा कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार शिकायत में आरोप लगाया गया है कि छात्राओं को कथित रूप से उकसाकर छात्रावास से बाहर निकाला गया और बाद में सड़क पर चक्काजाम कराया गया। बड़वानी और खरगोन जिलों में पिछले कुछ वर्षों से छात्र-छात्राओं द्वारा अपनी शिकायतों को लेकर पैदल मार्च करने के मामले सामने आते रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में छात्र आंदोलन के सिलसिले में छात्राओं को कथित रूप से उकसाने के आरोप में लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने का यह तीसरा मामला है।

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