पटना , जनवरी 27 -- बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने कृषि रोड मैप के अंतर्गत लघु एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक पंचायत में कस्टम हायरिंग सेंटर (सी.एच.सी) की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया है।

श्री यादव ने बताया कि सी.एच.सी का उद्देश्य यह है कि छोटे किसान भी समय पर खेती की सभी आवश्यक क्रियाओं को आधुनिक यंत्रों की सहायता से पूरा कर सकें।

कृषि मंत्री ने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना से किसानों को जुताई, बुआई/रोपनी, कटाई, मड़ाई (थ्रेसिंग) जैसी सभी प्रमुख कृषि गतिविधियों के लिए आधुनिक मशीनें किराये पर उपलब्ध होंगी। इससे न केवल खेती की लागत में कमी आएगी, बल्कि समयबद्ध कृषि कार्य होने से फसल की गुणवत्ता एवं पैदावार में भी सुधार होगा।उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिये अधिकतम 10 लाख रुपये की परियोजना लागत निर्धारित की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत स्थानीय फसल चक्र के अनुरूप ट्रैक्टर चालित अथवा स्वचालित जुताई, बुआई/रोपनी, हार्वेस्टिंग एवं थ्रेसिंग से संबंधित प्रत्येक कृषि क्रिया के लिए कम-से-कम एक-एक यंत्र लेना अनिवार्य है।

श्री यादव ने बताया कि 10 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 35 बीएचपी अथवा उससे अधिक क्षमता के ट्रैक्टर पर अधिकतम 1,60,000 रुपये तथा अन्य कृषि यंत्रों पर 40 प्रतिशत अनुदान देय है। इस प्रकार एक कस्टम हायरिंग सेंटर पर अधिकतम 4.00 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में कुल 267 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके विरुद्ध ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 221 किसानों का चयन कर उन्हें स्वीकृति पत्र निर्गत किया जा चुका है।

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