ऋषिकेश , जुलाई 13 -- उत्तराखंड में ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में कश्मीर शहीद दिवस के अवसर पर आयोजित गंगा आरती राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर वीरों को समर्पित की गई।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने सोमवार को शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
स्वामी सरस्वती ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों, सुरक्षा बलों और उनके परिवारों के त्याग एवं समर्पण में निहित होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तो संस्कृति, आस्था और भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। इसलिए राष्ट्रसेवा केवल सैनिकों का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक और आध्यात्मिक कर्तव्य है।
उन्होंने भारतीय सेना के साहस, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए कहा कि सैनिक वेतन के लिए नहीं, बल्कि वतन के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। विषम परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा कर वे पूरे देश को सुरक्षा का विश्वास दिलाते हैं। ऐसे वीरों के योगदान का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता।
परमार्थ निकेतन अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृभूमि की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। देवभक्ति के साथ देशभक्ति का भाव ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार है। युवाओं से उन्होंने राष्ट्रप्रेम को जीवन का संस्कार बनाने, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव, संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान तथा अनुशासित जीवन अपनाने का आह्वान किया।
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