श्रीनगर , सितंबर 04 -- कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें फिर से घर में नजरबंद कर दिया गया है और ऐतिहासिक जामिया मस्जिद श्रीनगर जाने से रोक दिया गया है, जहां उन्हें एक धार्मिक समारोह की अध्यक्षता करनी थी।

मीरवाइज ने कहा कि ये पाबंदियां उन्हें लोगों की आवाज उठाने से रोक नहीं पायेंगी।

मीरवाइज ने 'एक्स' पर जारी बयान में कहा, "जामा मस्जिद के मिंबर (मंच) को खामोश करने और लोगों की चिंताओं को उठाने, उनके अधिकारों व न्याय के पक्ष में खड़े होने की सजा देने की नीति बेरोक-टोक जारी है। आज शुक्रवार के दिन मुझे फिर से घर में नजरबंद कर दिया गया है।"उन्होंने कहा, "खासकर शुक्रवार को जामा मस्जिद में नमाजियों को संबोधित करने और मीरवाइज के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकने वाली ये पाबंदियां व्यक्तिगत रूप से बेहद दर्दनाक हैं, लेकिन ये मुझे अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने और लोगों के अधिकारों के लिए उनकी आवाज उठाने से नहीं डिगा सकतीं।"इस बीच, मीरवाइज ने कहा कि श्रीनगर की एक अदालत में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष यासीन मलिक का हलफनामा, विशेष रूप से खुद को बेकसूर बताते हुए मामले की आगे पैरवी न करने और सजा-ए-मौत मांगने का फैसला काफी चिंताजनक है।

हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज ने कहा, "यह फैसला उनसे किये गये वादों पर गंभीर आत्मचिंतन की मांग करता है और उचित प्रक्रिया, निष्पक्षता तथा मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता को चिह्नित करता है।"श्रीनगर की एक अदालत के समक्ष दाखिल हालिया हलफनामे में जेल में बंद मलिक ने 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है, इसके बावजूद उन्होंने खुद के लिए मृत्युदंड की मांग करते हुए आगे इस मामले में अपनी पैरवी न करने का निर्णय की घोषणा की है।

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