श्रीनगर , सितंबर 24 -- जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने गुरुवार को जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई सरकारी शिक्षण संस्थानों में कराने को अनिवार्य करने वाले एक निजी सदस्य विधेयक को खारिज कर दिया।
विधायक शेख खुर्शीद अहमद द्वारा पेश किये गये विधेयक में 'जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों' के लिए अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन की समस्या का समाधान करना था।
विधेयक पेश करते हुए श्री खुर्शीद ने कहा कि विधानसभा पिछले दो दिनों से शिक्षा क्षेत्र पर चर्चा कर रही है और केवल बुनियादी ढांचे में सुधार से सरकारी स्कूलों को फिर से बेहतर स्थिति में लाना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में करीब 77 प्रतिशत स्कूल सरकारी हैं, लेकिन इन संस्थानों में छात्रों के नामांकन में लगातार कमी आ रही है। सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि करीब 3,000 सरकारी स्कूलों में 10 से भी कम छात्र नामांकित हैं।
श्री खुर्शीद ने घटते नामांकन के लिए अन्य कारणों के अलावा नीति-निर्माताओं, सरकारी कर्मचारियों, मंत्रियों और विधायकों का अपने बच्चों के लिए निजी स्कूलों को प्राथमिकता देने को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, ''अगर हम अपने सरकारी स्कूलों में सुधार करना चाहते हैं तो केवल बुनियादी ढांचा पर्याप्त नहीं होगा।'' उन्होंने सरकार से विधेयक को सीधे खारिज नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराते हैं, तो इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों का विश्वास बढ़ सकता है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को भी लाभ मिल सकता है।
विधेयक पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने सदस्य द्वारा उठायी गयी चिंताओं को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि प्रस्तावित कानून को लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे माता-पिता को अपने बच्चे की शिक्षा के लिए संस्थान चुनने के मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकारी स्कूलों में 'काफी सुधार' हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से बुनियादी ढांचे, परीक्षा परिणामों, नामांकन और स्मार्ट कक्षाओं की शुरुआत में हुए सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अभी भी इस मामले में सुधार करने की जरूरत है और सरकार सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार 'स्कूल चलो' पहल और अभिभावकों तथा शिक्षकों के बीच संवाद जैसे उपायों पर ध्यान दे रही है, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
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