श्रीनगर , अगस्त 14 -- कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया था कि सोशल मीडिया पर एक कथित धमकी भरा पत्र सामने आने के बाद प्रशासन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को घर से काम करने (वर्क-फ्रॉम-होम) का मौखिक आदेश दिया है।
श्री गर्ग ने पत्रकारों से कहा, "देखिए, इस तरह का कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है।" उन्होंने जनता से अपील की कि वे सरकार और प्रशासन की ओर से जारी प्रामाणिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
उन्होंने कहा, "हम सभी को सूचना विभाग, सरकार और प्रशासन की ओर से जारी प्रामाणिक सूचना माध्यमों पर भरोसा करना चाहिए। हमें उन पर विश्वास करना चाहिए।" सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों, निवासियों और स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने वालों के लिए पर्याप्त इंतजाम किये गये हैं। जहां तक सुरक्षा की बात है, पुख्ता इंतजाम किये गये हैं, चाहे वे कर्मचारी हों, निवासी हों या वे लोग जो 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग ले रहे हैं।
उन्होंने लोगों से पूरे कश्मीर में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में भाग लेने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा, "मैं आप सभी से अनुरोध करना चाहूंगा कि आप अपने-अपने जिलों या श्रीनगर में कल होने वाले कार्यक्रम में भाग लें।"संभागीय आयुक्त की यह टिप्पणी उन रिपोर्टों के बीच आयी है जिनमें कहा गया था कि अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के विशेष रोजगार पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मौखिक रूप से सलाह दी थी कि वे 20 अगस्त तक अपने कार्यालय न जायें, क्योंकि सोशल मीडिया पर समुदाय के छह सदस्यों के नाम वाला एक धमकी भरा पत्र सामने आया था।
इससे पहले आज मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों की लक्षित हत्याओं (टारगेटेड किलिंग) की पिछली घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा , "इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके पीछे के लोगों की जांच होनी चाहिए और जिन लोगों को खतरा है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।"नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से उन दोषियों की पहचान करने का आग्रह किया था जिन्होंने कश्मीरी पंडितों को धमकी दी थी।
घाटी में अलग मातृभूमि के लिए संघर्ष कर रहे कश्मीरी पंडित समूह 'पनून कश्मीर' ने हाल ही में कहा था कि यह धमकी 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' की ओर से जारी की गयी थी, जिसमें विशेष रूप से समुदाय के सदस्यों के नाम और उनके टेलीफोन नंबर उजागर किये गये थे।
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