श्रीनगर , जून 13 -- जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार को संकेत दिया है कि घाटी में विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी और उनके पुनर्वास की सुविधा के लिए वह पूर्ववर्ती उमर अब्दुल्ला सरकार के कार्यकाल के दौरान गठित की गई 'शीर्ष समिति' का पुनर्गठन करेगी।

मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर वानी ने कहा कि अब समय आ गया है कि आरोपों-प्रत्यारोपों से ऊपर उठकर इस समुदाय की ससम्मान वापसी के लिए ठोस दिशा में आगे बढ़ा जाए।

विगत वर्षों में की गई पहलों का जिक्र करते हुए श्री वानी ने कहा कि तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की निगरानी के लिए एक शीर्ष समिति का गठन किया गया था। उन्होंने बताया कि इस समिति को फिर से पुनर्जीवित किया जाएगा और सरकार मौजूदा जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए इस समुदाय के साथ "सूक्ष्म स्तर पर बातचीत" शुरू करने की दिशा में काम करेगी।

श्रीनगर में आयोजित "ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव: फ्रॉम एक्जाइल टू एक्सीलेंस"के इतर पत्रकारों से बात करते हुए श्री वानी ने कहा,"हम चाहते हैं कि उस शीर्ष समिति को फिर से स्थापित किया जाए ताकि कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए एक स्थायी समाधान निकाला जा सके।" सलाहकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा घोषित पुनर्वास पैकेज के तहत किए गए उपायों का भी उल्लेख किया और कहा कि उस योजना के तहत कई कश्मीरी पंडित युवाओं को सरकारी नौकरियां मिलीं और बाद में उनके लिए 'ट्रांजिट आवास' (पारगमन आवास) स्थापित किए गए।

उन्होंने समुदाय के सदस्यों से अपील की कि वे कश्मीर के भीतर ही आकर संवाद की प्रक्रिया में शामिल हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिकायतों और समस्याओं पर यहीं जमीनी स्तर पर चर्चा होनी चाहिए ताकि आपसी सुलह और वापसी के रोडमैप को अंतिम रूप दिया जा सके।

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