सहारनपुर , सितंबर 8 -- सहारनपुर में कलेक्ट्रेट मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और पूर्व सांसद हाजी फजर्लुरहमान कुरैशी से अलग-अलग मुलाकात कर मामले के विभिन्न पहलुओं तथा आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर विचार-विमर्श किया।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने दोनों नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता समेत जमीयत के कई पदाधिकारी और प्रमुख सदस्य मौजूद रहे। बैठक के बाद मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने पत्रकारों से कहा कि जमीयत ने प्रमुख अधिवक्ताओं के साथ मामले पर चर्चा की है और कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में कानूनी कार्रवाई के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि जमीयत न्याय के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आगे बढ़ेगी।
उन्होंने सहारनपुर समेत देश के मुस्लिम समुदाय से शांति और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह समय धैर्य से काम लेने का है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के ध्वस्तीकरण से मुस्लिम समुदाय दुखी है, लेकिन उनके हिंदू भाई भी इससे कम दुखी नहीं हैं।
बैठक में मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता नौशाद अहमद, जमीयत उलेमा-ए-हिंद दिल्ली के अध्यक्ष मौलाना कासिम नूरी, हरियाणा, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना अली हसन मजाहिरी, दिल्ली के महासचिव मौलाना यूसुफ कासमी, राष्ट्रीय सचिव मौलाना अजीमुल्ला कासमी, हाफिज अबू बकर, मौलाना गुलफाम, मौलाना सरताज, मौलाना फरीद मजाहिरी, सैय्यद हस्सान और कारी अब्दुल हसीब समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कई नेताओं ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। सपा सांसद हरेंद्र मलिक, इकरा हसन, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव, एमएलसी किरणपाल कश्यप, पूर्व सांसद हाजी फजर्लुरहमान कुरैशी तथा सपा विधायक उमर अली और आशु मलिक ने मस्जिद को कथित रुप से गैरकानूनी तरीके से गिराए जाने पर सवाल उठाए हैं।
लाल बिहारी यादव ने आरोप लगाया कि सहारनपुर आने से रोकने के लिए उनके प्रतिनिधिमंडल के 12 सदस्यों को विभिन्न जिलों में उनके घरों पर नजरबंद किया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति बताया।
उधर, पुरातत्व विभाग के अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने मस्जिद के नीचे मिले कुएं को करीब 200 से 250 वर्ष पुराना बताया है। उन्होंने कहा कि स्थल के निरीक्षण के दौरान अब तक ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, जिनसे वहां मंदिर होने की पुष्टि होती हो। उनके अनुसार, पहली नजर में कुएं में इस्तेमाल निर्माण सामग्री मध्यकालीन दौर से संबंधित प्रतीत होती है।
डॉ. यादव ने करीब 20 फुट लंबी सीढ़ी के सहारे कुएं में उतरकर उसकी निर्माण शैली और इस्तेमाल की गई सामग्री का निरीक्षण किया।
मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि ध्वस्तीकरण के खिलाफ एक-दो दिन के भीतर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
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