सहारनपुर , जुलाई 17 -- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक पुरानी मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने मस्जिद प्रबंधन को एक माह के भीतर स्वयं ढांचा हटाने का आदेश दिया है। आदेश का पालन न होने पर प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण कराए जाने तथा उसका पूरा व्यय मस्जिद प्रबंधन से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कलेक्ट्रेट परिसर स्थित खसरा संख्या 539, पठानपुरा में लगभग 315 वर्ग मीटर भूमि पर निर्मित मस्जिद के संबंध में सुनवाई के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है। न्यायालय ने मस्जिद प्रबंधन पर 6.31 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति जमा कराने का भी आदेश दिया है।
मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद और उनके अधिवक्ता परवेज जब्बार ने फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि वे इसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। उनका दावा है कि मस्जिद ब्रिटिशकालीन है तथा इसके समर्थन में वर्ष 1911 का बिजली बिल सहित अन्य दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं।
प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार तत्कालीन जिलाधिकारी एवं वर्तमान आगरा जिलाधिकारी मनीष बंसल के कार्यकाल में एक हिंदू संगठन की शिकायत पर मामले की जांच कराई गई थी। जांच में भूमि को सरकारी बताते हुए 16 अप्रैल 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान राजस्व अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के निष्कर्ष की पुष्टि हुई।
जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने कहा कि जिला प्रशासन सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश का विधि सम्मत पालन सुनिश्चित करेगा। यदि निर्धारित एक माह की अवधि में अवैध निर्माण नहीं हटाया गया तो प्रशासन स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह भी जिला प्रशासन ने विभिन्न गांवों में स्थित कई मस्जिदों और मदरसों को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई के आदेश जारी किए थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित