धारवाड़ , मार्च 19 -- कर्नाटक के धारवाड़ जिले के कलघटगी में हाल में हुई भारी ओलावृष्टि से यह इलाका सफेद चादर से ढक गया और देखते ही देखते किसी पर्वतीय स्थल की तरह दिखने लगा।

कुछ समय के लिए यह क्षेत्र उत्तर कर्नाटक के शहर के बजाय किसी शीतकालीन विश्राम स्थल जैसा दिखने लगा। खेत, छतों और राजमार्गों पर ओलों की मोटी परत बिछ गई, जिससे इस उष्णकटिबंधीय परिदृश्य को बर्फ से लदी एक अनोखी शक्ल मिल गई। इस दुर्लभ नजारे को देखने और उसका आनंद लेने के लिए यहां के लोग घरों से बाहर निकल आए।

मौसम के इस बदलाव के पीछे हालांकि व्यवधान भी नता आए। भारी ओलावृष्टि ने कुछ देर के लिए इस इलाके को बर्फीला रूप देकर इंटरनेट पर सबका ध्यान जरूर खींचा, लेकिन अधिकारियों ने आम जनता को लापरवाही के प्रति आगाह किया है। उन्होंने बिजली आपूर्ति में व्यवधान, यातायात जाम और पेड़ों की टहनियां गिरने के खतरों की ओर भी संकेत किया है।असामान्य तीव्रता के साथ अचानक हुई ओलावृष्टि ने आवाजाही को लगभग रोक दिया। सड़कों पर वाहनों की कतारें लग गईं क्योंकि चालकों ने जोखिम के बजाय सावधानी बरतना उचित समझा और धूप में बर्फ के पिघलने का इंतजार किया। फिसलन भरी सतहों ने मुख्य मार्गों को अस्थायी रूप से दुर्गम क्षेत्रों में बदल दिया, जिससे दैनिक दिनचर्या बाधित हुई और पूरे क्षेत्र में यातायात धीमा हो गया।

धारवाड़ जिले के अन्य हिस्सों में मध्यम वर्षा दर्ज की गई, लेकिन कलघटगी को इस मौसम की मार सबसे ज्यादा झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने अचानक आये इस तूफान बेहद शक्तिशाली बताया, जो किसी गुजरती बौछार के बजाय वायुमंडलीय विस्फोट जैसा था।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि कर्नाटक में आने वाले दिनों में मौसम का यह अस्थिर स्वरूप बना रहने की संभावना है।

मौसम विभाग ने यह चेतावनी भी दी है कि 20 मार्च तक तटीय, उत्तरी आंतरिक और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में हल्की से मध्यम वर्षा, बिजली चमकने और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। बेंगलुरु, मैसूर, कोलार और हासन सहित शहरी केंद्रों में भी रुक-रुक कर बौछारें और गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं।

चूंकि मौसम अभी भी अनिश्चित बना हुआ है, इसलिए निवासियों को गरज के साथ बौछारें पड़ने के दौरान घरों के अंदर रहने और खुले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी गई है।

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