चंडीगढ़ , अगस्त 27 -- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका लंबित महंगाई भत्ता (डीए) देने में आनाकानी करने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

श्री रंधावा ने कहा कि जब कर्मचारियों की मांगें उनके कानूनी अधिकारों से जुड़ी हैं और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय भी इस संबंध में आदेश दे चुका है, तो सरकार को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय अदालत के आदेशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों से बातचीत करने के बजाय सरकार उन्हें डराने-धमकाने की नीति अपना रही है, जिसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। जिन्होंने अपना पूरा जीवन राज्य की सेवा में लगाया, उन्हें अपने जायज अधिकारों के लिए सरकार के खिलाफ संघर्ष करने को मजबूर करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

श्री रंधावा ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी वित्तीय कुप्रबंधन की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर डालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में राजनीतिक प्रचार और पार्टी गतिविधियों पर सरकारी संसाधन खर्च किये जा सकते हैं, तो पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के जायज बकाये के भुगतान के लिए खजाना खाली होने की बात क्यों कही जा रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सत्ता के अहंकार को छोड़कर कर्मचारियों से संवाद करने, अदालत के आदेशों का सम्मान करने और उनके लंबित वैध बकाये तत्काल जारी करने की मांग की।

श्री रंधावा ने कहा कि कांग्रेस कर्मचारियों और पेंशनरों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी आवाज दबाने नहीं देगी।

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