मोहाली , मार्च 14 -- पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने शनिवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है, जिसमें राज्य सरकार को छठे वेतन आयोग के लंबित बकाया और महंगाई भत्ते (डीए) की बकाया किस्तों का भुगतान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को छह प्रतिशत ब्याज के साथ करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने इस फैसले को कर्मचारियों की एक बड़ी जीत बताया।

यहां जारी एक प्रेस बयान में श्री सिद्धू ने कहा कि अदालत ने भगवंत मान सरकार को आइना दिखा दिया है, जो बार-बार यह दावा करती है कि राज्य का खजाना भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि अदालत की यह टिप्पणी अत्यंत गंभीर है कि, "वित्तीय संकट का हवाला देकर कर्मचारियों के अधिकारों को कुचलना सरकार की ओर से गैर-जिम्मेदारी, लापरवाही और असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।" उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लगभग 35,000 कर्मचारी और पेंशनभोगी अपनी हक की कमाई की किस्तों का इंतजार करते-करते दुनिया छोड़ गये। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा सरकार की विफलता का जीवित प्रमाण है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पंजाब के प्रशासनिक ढांचे में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए कहा, " कर्मचारी राज्य की रीढ़ हैं। चाहे वह स्वास्थ्य विभाग हो, शिक्षा हो या कोई अन्य प्रशासनिक इकाई, राज्य इन कर्मचारियों के दिन-रात के प्रयासों के कारण ही चलता है। यह प्रत्येक सरकार का कर्तव्य है कि वह उन्हें सड़कों पर उतारने के बजाय उनके बकाया का समय पर भुगतान सुनिश्चित करे। "श्री सिद्धू ने कहा कि अदालत द्वारा लगाया गया छह प्रतिशत ब्याज इस बात की पुष्टि करता है कि सरकार ने कर्मचारियों के साथ गंभीर अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को बिना किसी देरी के इस फैसले को तुरंत लागू करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लंबित बकाया जल्द से जल्द कर्मचारियों के खातों में जमा किया जाये। कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी और वे स्वयं हमेशा कर्मचारियों के साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में भी उनके साथ खड़े रहेंगे।

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