बेंगलुरु , अक्टूबर 30 -- कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने शुक्रवार को राज्य सरकार पर सूखा प्रभावित किसानों को मुआवजा देने में देरी करने और उन्हें अनावश्यक प्रशासनिक अड़चनों में उलझाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार संकटग्रस्त किसानों के लिए 2,500 रुपये की मामूली सहायता राशि प्राप्त करना भी मुश्किल बना रही है।

मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पर निशाना साधते हुए श्री अशोक ने कहा कि सरकार के प्रस्तावित 2,500 रुपये के एकमुश्त मुआवजे के साथ कम से कम 17 शर्तें थोप दी गयी हैं।

सोशल मीडिया पर जारी बयानों में भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कम बारिश के कारण फसलों का नुकसान झेलने वाले किसानों को राहत राशि पाने के लिए एक सरकारी दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान पहले से ही फसल की बर्बादी झेल रहे हैं, ऐसे में 'फ्रूट्स' पोर्टल पर पंजीकरण, आधार लिंक, किसान पहचान और बैंक खाते की अनिवार्यताओं जैसी शर्तें लगाने का क्या औचित्य है।

श्री अशोक ने कहा, "क्या सरकार की नीयत किसानों को मुआवजा देने की नहीं है या फिर उसका खजाना खाली हो चुका है? यदि सरकार राहत प्रदान करने में असमर्थ है, तो उसे शर्तों का जाल बिछाकर किसानों को परेशान करने के बजाय खुले तौर पर इसे स्वीकार करना चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि मानसून की विफलता के करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी सरकार प्रभावित किसानों की पहचान करने और मुआवजे की सूची समय पर तैयार करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि 'फ्रूट्स' पोर्टल, आधार लिंकिंग, बैंक खातों और भूमि अभिलेखों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को प्रशासन स्तर पर सुलझाने के बजाय सरकार इसकी जिम्मेदारी किसानों पर डाल रही है।

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