बेंगलुरु , मार्च 23 -- कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने सोमवार को कहा कि राज्य में संस्थानों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति जारी रखने के लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गैल) के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक आपूर्ति में रुकावटों के कारण ईंधन की देशव्यापी कमी के बीच राज्य सरकार ने आपूर्ति को सामान्य उपयोग के केवल 20 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है।
श्री मुनियप्पा ने मौजूदा संकट के बीच 20 प्रतिशत आवंटन पर ज़ोर देते हुए कहा, "कर्नाटक में संस्थानों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति जारी रखने के लिए गैल के साथ पंजीकरण कराना होगा।" राज्य विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने प्रतिष्ठानों और उद्योगों से आत्मनिर्भरता के महत्व पर ज़ोर देते हुए, लकड़ी, बिजली, सौर ऊर्जा और बायोगैस सहित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "भूखे रहने की कोई ज़रूरत नहीं है। कुछ बदलाव ज़रूरी हैं, और भविष्य में हमें विदेशी स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी।" उन्होंने बताया कि सरकार अगले हफ़्ते आपूर्ति के स्तर की समीक्षा करेगी और आवंटन बढ़ाने के तरीकों पर विचार करेगी। सरकार ने आवंटन को तर्कसंगत बनाते हुए इसे घटाकर लगभग 16,000 वाणिज्यिक सिलेंडर प्रतिदिन कर दिया है, जो पहले औसतन 45,000 था। इसमें शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक उपयोगिताओं और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है।
श्री मुनियप्पा ने चेतावनी दी कि जो संस्थाएँ पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें एलपीजी प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। संशोधित आवंटन के तहत, शैक्षणिक संस्थानों को 4,200 सिलेंडर, सरकारी प्रतिष्ठानों (जिनमें हवाई अड्डे और रेलवे शामिल हैं) को 1,200 सिलेंडर, और होटलों को लगभग 10,000 सिलेंडर आवंटित किए गये हैं। कृषि, बीज प्रसंस्करण और दवा क्षेत्रों के लिए प्रतिदिन 500 सिलेंडर निर्धारित किए गए हैं, जबकि आपात स्थितियों के लिए 205 सिलेंडर रिज़र्व में रखे गए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को शहरी क्षेत्रों में हर 25 दिन में एक बार और ग्रामीण क्षेत्रों में हर 40 दिन में एक बार सिलेंडर मिलेगा।
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