बेंगलुरु , अक्टूबर 03 -- कर्नाटक सरकार ने शनिवार को केंद्र सरकार से 3,705.30 करोड़ रुपये की सूखा राहत की मांग की।

राज्य में 240 तालुकों में से सूखा प्रभावित 217 तालुकों में स्थिति का आकलन करने के लिए केद्रीय टीम तीन दिवसीय दौरे पर है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने यहां केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू के नेतृत्व वाले केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल से मुलाकात की। उन्होंने केंद्र से राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) के मानदंडों के अनुसार राहत उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने उचित और न्यायसंगत राहत पैकेज की मांग करते हुए कहा कि राज्य ने सूखे की स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया है और केंद्र के आपदा प्रबंधन दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही प्रभावित तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है।

श्री शिवकुमार ने कहा कि कृष्णा नदी बेसिन को छोड़कर अधिकांश जलाशयों में पानी की आवक कम हो गयी है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से अधिक बारिश वाले मलनाड और तटीय कर्नाटक के क्षेत्रों में भी बारिश में भारी कमी दर्ज की गयी है। जल संकट अब शहरी क्षेत्रों तक भी पहुंच गया है और कई शहरों में पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

श्री शिवकुमार ने केंद्रीय दल से कहा, "किसान गंभीर संकट में हैं। अगर किसान संकट में रहते हैं तो सब कुछ ठप हो जाता है। केंद्र सरकार को कर्नाटक के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पहले ही 2,500 रुपये की राहत की घोषणा कर चुकी है, लेकिन अब केंद्र से अधिक सहायता की मांग की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सूखे ने कृषि अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ा दिया है। गन्ना उत्पादक अधिक कीमत की मांग कर रहे हैं, जबकि दुग्ध उत्पादक कम से कम 10 रुपये की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री साहू ने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय दल तीन दिनों तक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा, जमीनी स्थिति का आकलन करेगा और राज्य सरकार के अधिकारियों से संबंधित आंकड़े जुटायेगा। इसके बाद दल वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट सौंपेगा।

केंद्रीय दल के आकलन के आधार पर कर्नाटक की सूखा राहत की मांग पर आगे विचार किए जाने की उम्मीद है।

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