बेंगलुरु , अगस्त 09 -- कर्नाटक सरकार ने किसानों के भारी विरोध और राजनीतिक तनाव के बीच प्रस्तावित बिदादी बृहत्तर बेंगलुरु एकीकृत टाउनशिप परियोजना की जांच के लिए अवकाशप्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुहानथन नरेंदर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय चार सदस्यीय कमिटी का गठन किया है।
अधिकारियों ने बताया कि कमिटी इस बड़े टाउनशिप प्रस्ताव के अलग-अलग पहलुओं की जांच करेगी और राज्य सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
इस कमिटी में अवकाशप्राप्त मुख्य सचिव एसवी रंगनाथ, अवकाशप्राप्त अतिरिक्त मुख्य सचिव आर उमाशंकर और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अवकाशप्राप्त अधिकारी प्रसन्न कुमार समेत अन्य लोग शामिल हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह कमिटी उन लोगों की भावनाओं का सम्मान करने के लिए बनाई गई है जो इस परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि सरकार के आगे बढ़ने से पहले प्रभावित गांवों के सभी वर्गों की राय पर विचार किया जाए।
गौरतलब है कि 'बृहत्तर बेंगलुरु एकीकृत टाउनशिप' पहल के तहत प्रस्तावित इस टाउनशिप में बेंगलुरु दक्षिण जिले में बिदादी और हारोहल्ली के बीच के गांवों की हजारों एकड़ जमीन पड़ती है। जमीन अधिग्रहण, विस्थापन और आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर किसानों और गांव के लोग इस परियोजना का लगातार विरोध करते आ रहे हैं।
सरकार का यह फैसला जनता दल (एस) की ओर से टाउनशिप परियोजना के खिलाफ तीन दिन की पदयात्रा की योजना के ठीक पहले आया है, जिसे भाजपा का भी समर्थन प्राप्त है। यह मार्च बायरामंगला से शुरू होकर बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में खत्म होगा, जहां एक सम्मेलन भी प्रस्तावित है।
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