बेंगलुरु , अक्टूबर 29 -- कर्नाटक सरकार ने नंदिनी दूध की कीमत में एक नवंबर से आठ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि को मंजूरी दी है। इसके साथ ही डेयरी किसानों को दूध की खरीद पर मिलने वाली कीमत 35 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो जायेगी। राज्य सरकार ने दूध उत्पादकों की बेहतर भुगतान की बढ़ती मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया है।

राजस्व मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने गुरुवार को मंत्रिमंडल के इस सर्वसम्मत फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि कीमत में बढ़ोतरी के आठ रुपये में से सात रुपये दूध उत्पादकों को और एक रुपया डेयरी सहकारी समितियों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की मौजूदा पांच रुपये प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि जारी रहेगी। इस तरह किसानों को कुल 47 रुपये प्रति लीटर मिलेंगे।

यह फैसला दूध उत्पादन की बढ़ती लागत के बीच खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर दूध उत्पादकों के विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया है। किसानों ने शुरुआत में कम से कम 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने कई मंत्रिमंडल बैठकों में इस प्रस्ताव पर विचार किया और अंततः इसे मंजूरी दे दी।

दूध की कीमत में इस बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। दूध पर निर्भर कारोबार, विशेषकर चाय की दुकानों, होटलों, रेस्तरां और बेकरी पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसका वास्तविक प्रभाव कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) की ओर से नंदिनी दूध की विभिन्न किस्मों के लिए घोषित की जाने वाली नयी खुदरा कीमतों पर निर्भर करेगा।

सरकार ने इस महीने की शुरुआत में भी इस प्रस्ताव पर विचार किया था, लेकिन विधान परिषद चुनावों के कारण लागू आदर्श आचार संहिता को देखते हुए फैसला टाल दिया गया था। अब मंत्रिमंडल ने मूल्य वृद्धि को मंजूरी दे दी है और इसे एक नवंबर से लागू किया जायेगा।

नयी मूल्य व्यवस्था का उद्देश्य डेयरी किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने के साथ सहकारी समितियों की आय बढ़ाना है। आठ रुपये की कुल वृद्धि में से अधिकांश राशि दूध उत्पादकों को देने का निर्णय डेयरी क्षेत्र में बेहतर पारिश्रमिक की उनकी मांग के प्रति सरकार के रुख को दर्शाता है। केएमएफ और जिला दुग्ध संघों से उम्मीद है कि वे नई व्यवस्था लागू होने से पहले नंदिनी दूध की विभिन्न किस्मों की संशोधित कीमतों की जानकारी देंगे।

अब प्रमुख चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि खरीद मूल्य में वृद्धि से दूध उत्पादकों को पर्याप्त राहत मिले, लेकिन इसके कारण उपभोक्ताओं की मांग और रोजमर्रा की इस आवश्यक वस्तु की सामर्थ्य पर बहुत अधिक असर न पड़े।

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