बेंगलुरु , अक्टूबर 24 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप में निलंबित आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।
श्री शिवकुमार ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और न ही किसी दोषी को संरक्षण देगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर अभ्यर्थी योग्यता और कड़ी मेहनत के आधार पर निष्पक्ष अवसर का हकदार है। अभियोजन की मंजूरी मिलने से भर्ती घोटाले के मामले में अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी गंगवार फरवरी 2024 से इस वर्ष मार्च तक केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे। भर्ती अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तारी से पहले वे उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशक के पद पर तैनात थे। गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
यह मामला कर्नाटक में 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में अनियमितताओं से जुड़ा है। इसके लिए प्रतियोगी परीक्षा आठ और नौ जनवरी को आयोजित की गई थी और अंतिम चयन सूची 17 जुलाई को प्रकाशित की गई थी।
आरोपों के अनुसार, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था,और कुछ अभ्यर्थियों ने इसे हासिल करने के लिए भारी रकम चुकाई थी। जांचकर्ताओं ने अंकों में संभावित हेरफेर और शीर्ष रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों से जुड़ी अनियमितताओं की भी जांच की है।
अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने परीक्षा धोखाधड़ी की अपनी जांच के तहत 29 अगस्त को गंगवार को गिरफ्तार किया था। इस मामले में शामिल अन्य संदिग्ध लोग भी जांच के दायरे में आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय भर्ती अनियमितताओं से जुड़े संभावित धन शोधन मामले की अलग से जांच कर रहा है।
इस मामले ने केपीएससी की ओर से आयोजित की जाने वाली भर्ती प्रक्रियाओं की शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो राज्य सरकार की विभिन्न सेवाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन करता है। प्रश्नपत्र लीक और अंकों में हेरफेर के आरोपों ने निष्पक्ष और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया पर निर्भर अभ्यर्थियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
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