बेंगलुरु , जून 15 -- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाया और राज्य प्रशासन पर वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं सहित कृषि बुनियादी परियोजनाओं के लिए उपलब्ध केन्द्रीय मदद का इस्तेमाल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
श्रीमती सीतारमण ने देवनहल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जनकल्याण वादों के पीछे पर्याप्त वित्तीय संसाधन होने चाहिए और राज्यों को अपनी वित्तीय क्षमता से ज़्यादा योजनाओं की घोषणा करने के खिलाफ चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, "मैं एक तय लाइन खींचती हूं। अगर आपके बजट में संसाधन हैं, तो जनकल्याण योजनाएं दें और उन पर सदन में पारदर्शिता तरीके से चर्चा करें। लेकिन बिना पैसे के वादे न करें और बाद में फंड न देने के लिए केंद्र पर आरोप न लगाएं।"उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने जनकल्याण उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है क्योंकि उनके वित्त ने उन्हें ऐसा करने की इजाज़त दी, जबकि दूसरे बड़े-बड़े वादे करने के बाद भी प्रतिबद्वता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
श्रीमती सीतारमण की यह बात कर्नाटक में भाजपा और कांग्रेस सरकार के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई के बीच आई है। यह लड़ाई राज्य की गारंटी स्कीमों के वित्तीय बोझ और केंद्र द्वारा राज्य को संसाधन का उसका सही हिस्सा न दिए जाने के आरोपों को लेकर चल रही है।
उन्होंने कृषि ढांचे पर ध्यान देते हुए राज्य सरकार के इस दावे को चुनौती दी कि केंद्र कर्नाटक से मदद नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य उन केन्द्रीय योजनाओं का फायदा उठाने में नाकाम रहा है जो खेती से जुड़ी भंडारण सुविधाओं के लिए वित्तीय मदद देती हैं।
उन्होंने विजयनगर जिले के अपने हालिया दौरे का ज़िक्र करते हुए कहा कि फल और फूल उगाने वाले किसानों ने कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और मार्केट तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए बड़े हाईवे के पास वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की मांग की थी।
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