बेंगलुरु , मार्च 13 -- कर्नाटक विधानसभा सौध ,जिसे 'पीपुल्स पैलेस' के नाम से भी जाना जाता है, 70 वर्षों बाद आम जनता के लिए खुल गया है।
दशकों तक इसके भव्य गलियारे, बिना खंभों वाला विधानसभा हॉल और प्रभावशाली विशाल सीढ़ियाँ केवल बाहर से ही दिखाई देती थीं। अब इतिहास प्रेमी, वास्तुकला के शौकीन और जिज्ञासु यात्री इसके अंदर जा सकते हैं और उस इमारत के गवाह बन सकते हैं, जिसने स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
अनुभवी गाइड जे. ज्ञानशेखर ने कहा, "विधानसभा हॉल में प्रवेश करते समय लोगों की प्रतिक्रिया देखना अनमोल है। यह केंगल हनुमंतैया का सपना था, जिसे वर्षों तक यू.टी. खादर जैसे नेताओं का समर्थन मिला और के.जी. बोपैया के अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान इसे जीवंत किया गया।"श्री ज्ञानशेखर ने कहा, "वास्तव में, कर्नाटक के पूर्व अध्यक्ष बोपैया ही थे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक इमारत के लिए गाइड के रूप में मुझे सेवा करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक आदेश जारी किया था।"इसे केंगल हनुमंतैया द्वारा इसे परिकल्पित किया गया था और 13 जुलाई, 1951 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा इसकी आधारशिला रखी गयी थी।यह आजादी के बाद भारत की पहली ऐसी विधानमंडल इमारत थी जिसे विशिष्ट स्थानीय शैली में डिजाइन किया गया था।
कर्नाटक पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित नये 'वॉकिंग टूर' के माध्यम से आगंतुक जवाहरलाल नेहरू द्वारा रखी गई आधारशिला, चंदन का बना इस इमारत का एक जटिल मॉडल देख सकते हैं। इसके साथ ही, बैंक्वेट हॉल, सेंट्रल हॉल, भव्य स्तंभहीन विधानसभा हॉल, काउंसिल हॉल, मैसूर गेट, केंगल हनुमंतैया की प्रतिमा और फ्लावर गार्डन का भी भ्रमण कर सकते हैं।
यह दौरा 'ग्रैंड स्टेप्स' (विशाल सीढ़ियों) पर समाप्त होता है, जो सेल्फी और महल की भव्यता की शानदार तस्वीरों के लिए बेहतरीन जगह है।
श्री ज्ञानशेखर व्यक्तिगत रूप से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, दुनिया भर के रक्षा पत्रकारों, विधायकों और सांसदों का मार्गदर्शन कर चुके हैं। गुरुवार को उन्होंने गुरदासपुर के सांसद और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा की टीम को इसे दिखाया।
इसका दौरा कर्नाटक राज्य पर्यटन विकास निगम (केएसटीसी) प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसका शुल्क प्रति व्यक्ति मात्र 50 रुपये है। प्रत्येक दौरा लगभग 90 मिनट का होता है, जिसके लिए दिन भर में कई बैच उपलब्ध हैं।
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