बेंगलुरु , जून 18 -- कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शुरू हो गया। सत्तारूढ़ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी -जनता दल-सेक्युलर) (भाजपा-जद(एस) गठबंधन के बीच महत्वपूर्ण सातवीं सीट को लेकर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।

इस सीट को लेकर दोनों पक्षों ने व्यापक राजनीतिक रणनीति और जोड़-तोड़ की है। साथ ही, क्रॉस-वोटिंग (पार्टी लाइन से हटकर मतदान) की आशंकाओं ने चुनाव को और अधिक रोमांचक और संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सातवीं सीट का परिणाम राज्य की राजनीतिक स्थिति और गठबंधन की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जा रहा है।

विधानसभा में मतदान पूर्वाह्न नौ बजे शुरू हुआ और यह शाम चार बजे तक चलेगा, जबकि मतगणना शाम पांच बजे शुरू होगी। इस चुनाव में सात खाली सीटों के लिए आठ उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं। इस चुनाव का राजनीतिक महत्व इसलिए है क्योंकि डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस सरकार के लिए यह पहला चुनावी मुकाबला है।

उम्मीद है कि 224 सदस्यीय विधानसभा में अपनी-अपनी ताकत के बल पर कांग्रेस चार और भाजपा दो सीटें जीत लेंगी लेकिन बाकी सीट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा तय है। कांग्रेस के पास 134 विधायकों का समर्थन है। उसने पांच उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और निर्दलीय, छोटी पार्टियों और भाजपा से निकाले गए विधायकों से समर्थन जुटाकर पांचवीं जीत के लिए उसकी जोर आजमाइश जारी है। पार्टी ने अपने विधायकों को बिदादी के एक रिसॉर्ट में ठहरा रखा है, जहां अवैध वोटों से बचने के लिए मॉक मतदान प्रयोग और वरीयता आधारित मतदान प्रणाली पर विस्तृत रूप में ब्रीफिंग की गई।

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