तुमकुरु , मई 19 -- भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मंगलवार को दावा किया कि विकास का 'कर्नाटक मॉडल' श्रेष्ठ है। उन्होंने बहुप्रचारित 'गुजरात मॉडल' को 'खोखला' बताकर खारिज कर दिया।

तुमकुरु जिला प्रशासन और जिला पंचायत आयोजित 'तीन वर्ष की उपलब्धि समर्पण सम्मेलन' को संबोधित करते हुए श्री सिद्दारमैया ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने समावेशी और जनकल्याण-उन्मुख शासन का प्रदर्शन किया है, जो भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के बिल्कुल विपरीत है।

मुख्यमंत्री ने कहा, "विकास के कर्नाटक मॉडल के सामने गुजरात मॉडल खोखला साबित हो चुका है।" उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में तीन दशकों से अधिक समय से भाजपा का शासन होने के बावजूद वहां आम लोगों के लिए असमानता और मुश्किलें बनी हुई हैं।

गुजरात में एक गरीब परिवार के मकान का किराया न चुका पाने से जुड़े हाल के अपराध की घटना का हवाला देते हुए श्री सिद्दारमैया ने कहा कि ऐसी सच्चाइयां 'असली गुजरात मॉडल' को सामने लाती हैं, जबकि कर्नाटक ने कल्याणकारी गारंटियों और सामाजिक न्याय कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गृह मंत्री जी परमेश्वर की अध्यक्षता में तैयार पार्टी के घोषणापत्र में किये गये 580 वादों में से कांग्रेस सरकार ने 290 से अधिक आश्वासनों को पूरा कर दिया है और शेष प्रतिबद्धताओं को अगले दो वर्षों के भीतर लागू कर दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आने के तुरंत बाद पांच गारंटी योजनाएं शुरू की गयीं। उन्होंने दावा किया कि राज्य ने बड़ी आर्थिक प्रगति हासिल की है, जिसके तहत कर्नाटक राष्ट्रीय जीएसटी पूल में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और देश में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय दर्ज करने वाले राज्यों में से एक है।

केंद्र पर हमला तेज करते हुए श्री सिद्दारमैया ने मोदी सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती जीवन लागत को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत सरकार में ईंधन और सोने की कीमतें आसमान छू गयी हैं और दावा किया कि आर्थिक रूप से केवल कॉर्पोरेट घरानों को फायदा हुआ है, जबकि आम नागरिक संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रणाली की भी आलोचना की और केंद्र पर सीईटी (सीईटी) जैसी शैली के मॉडल के लिए कर्नाटक के सुझाव को नजरअंदाज करने तथा परीक्षा से जुड़े छात्रों के तनाव व संकट का समाधान करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

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