बेंगलुरु, तीन जुलाई (वार्ता) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने शुक्रवार को किसानों से अपील की है कि वे अधिक पानी की खपत वाली फसलों की खेती न करें और सिंचाई के लिए जलाशयों के पानी पर निर्भर न रहें। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य गंभीर सूखे जैसी हालत की ओर बढ़ रहा है क्योंकि प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक बहुत कम हो गई है और बरसात भी सामान्य से कम है।
स्थिति को गंभीर बताते हुए श्री शिवकुमार ने कहा कि किसानों को मानसून और पानी की वास्तविक उपलब्धता के आधार पर ही फसल लगाना चाहिए। उन्होंने सचेत किया कि अगर जलाशयों का जलस्तर कम रहा, तो सरकार सिंचाई के लिए पानी देने की हालत में नहीं होगी। उन्होंने कहा, "पानी छोड़ने के लिए सरकार पर दबाव नहीं बना कर बरसात के हिसाब से खेती करनी होगी। लेकिन अगर बादल भरपूर पानी बरसेंगे, तो हम पानी उपलब्ध कराएंगे।"मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों को इस साल गंभीर सूखे की संभावना के प्रति सचेत किया है, जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने व्यापक उपाय अपनाना शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में तुंगभद्रा, घाटप्रभा, मालप्रभा, नारायणपुरा और वाणीविलास जलाशयों में पानी की आवक लगभग शून्य है, जबकि कावेरी के इलाकों में भी कम बरसात हुई है, जिससे जल संकट की संभावना बढ़ गई है।
संभावित स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने ऊर्जा विभाग को समुचित बिजली का प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं और जिला प्रशासनों को पेयजल तथा पशुचारे के लिए व्यवस्था करने को कहा है। अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में नलकूपों की खुदाई में तेजी लाने के लिए भी कहा गया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित