बेंगलुरु/नई दिल्ली , मई 26 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य बी.के. हरिप्रसाद ने कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की बढ़ती अटकलों के बीच मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का बचाव किया और घोषणा की कि कांग्रेस ने उन्हें पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए राज्य का नेतृत्व करने के लिए चुना है।
श्री हरिप्रसाद की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब श्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नई दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय चर्चा की, जिससे राज्य में सत्ता के संभावित बंटवारे के फॉर्मूले को लेकर नयी राजनीतिक सुगबुगाहट शुरू हो गयी है।
श्री हरिप्रसाद ने नेतृत्व परिवर्तन की रिपोर्टों को "मनगढ़ंत दुष्प्रचार" बताते हुये खारिज कर दिया और भाजपा पर कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए सोशल मीडिया और व्हाट्सएप नेटवर्क के जरिये एक समन्वित दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "जब सिद्दारमैया जी को चुना गया था, तो उन्हें पांच साल के लिए चुना गया था। जब तक भ्रष्टाचार या इसी तरह के गंभीर आरोप नहीं लगते, तब तक नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। हमें भाजपा की ट्रोल सेना को जवाब देने की कोई आवश्यकता नहीं है।"श्री सिद्दारमैया को मिले इस जोरदार समर्थन को कांग्रेस के भीतर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, वह भी ऐसे समय में जब प्रमुख संगठनात्मक और चुनावी फैसलों से पहले आंतरिक पैरवी और उत्तराधिकार की अटकलें फिर से सामने आ गई हैं।
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य सलीम अहमद ने इस राजनीतिक कौतुहल को कम करने का प्रयास करते हुये कहा कि दिल्ली की बैठकें संगठनात्मक मामलों और आगामी राज्यसभा व विधान परिषद चुनावों की तैयारियों पर केंद्रित थीं।
श्री सिद्दारमैया ने इससे पहले दिन में व्यापक रणनीतिक चर्चाओं में शामिल होने से पहले कांग्रेस महासचिवों के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से मुलाकात की। इनमें श्री शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुये थे। पार्टी की ओर से बार-बार दिये जा रहे इस आश्वासन के बावजूद कि ये बैठकें सामान्य थीं, कर्नाटक के नेतृत्व का सवाल राजनीतिक गलियारों में छाया हुआ है। खासकर तब जब 2023 के विधानसभा चुनावों में भारी जनादेश के साथ कांग्रेस को सत्ता में लौटे लगभग तीन साल होने वाले हैं।
हाल के महीनों में कई कांग्रेस विधायकों ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री पद के लिये श्री शिवकुमार का समर्थन किया है। इससे पार्टी के अंदर इस कथित समझौते पर बहस छिड़ गयी है कि राज्य की सत्ता को बारी-बारी से साझा किया जाना चाहिये। दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में श्री सिद्दारमैया से जुड़े संभावित वैकल्पिक प्रबंधों को लेकर भी अटकलें तेज हैं, जिसमें उनका राज्यसभा में जाना भी शामिल है।
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