बेंगलुरु , अप्रैल 20 -- कर्नाटक सरकार शराब पर लगने वाले कर की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। राज्य अब बोतल आधारित कर प्रणाली को छोड़कर अल्कोहल की मात्रा (अल्कोहल स्ट्रेंथ) पर आधारित कराधान प्रणाली अपनाने की तैयारी में है। इस बदलाव का सीधा असर बीयर से लेकर व्हिस्की तक हर पेय की कीमतों पर पड़ सकता है।

राज्य सरकार ने कर्नाटक आबकारी नियम, 1968 में संशोधन के लिए एक नया मसौदा जारी किया है। अभी शराब पर कर अलग-अगल श्रेणियों के अनुसार लगता है, जैसे बोतल की प्रकार या शराब की कीमत के आधार पर, लेकिन अगर यह संशोधन लागू होता है तो कर अल्कोहल की मात्रा के आधार पर लगेगा। इस प्रणाली को 'अल्कोहल-इन-बेवरेज' (एआईबी) प्रणाली के नाम से जाना जाता है।

मसौदे के अनुसार, वितरकों को आपूर्ति की जाने वाली डिस्टिल्ड स्पिरिट पर प्रति लीटर शुद्ध अल्कोहल पर 1,000 रुपये का उत्पाद शुल्क लगेगा, चाहे उत्पाद कर्नाटक में बना हो, अन्य राज्यों से लाया गया हो या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयात किया गया हो। बोतलबंद बीयर के लिए भी इसी दर का प्रस्ताव दिया गया है।

यह बदलाव कर्नाटक के उत्पाद शुल्क कराधान के दृष्टिकोण में एक बदलाव को रेखांकित करता है। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि इससे विभिन्न श्रेणियों की कीमतों में बदलाव आ सकता है। समान अल्कोहल-सामग्री बेंचमार्क के तहत अधिक अल्कोहल वाले शराब महंगे हो सकते हैं, जबकि हल्के अल्कोहल की मात्रा वाले पेय की कीमतों में भी बदलाव आ सकता है।

रक्षा और अर्धसैनिक कैंटीनों को होने वाली खुदरा आपूर्ति के लिए फिलहाल मौजूदा बल्क-लीटर आधारित संरचना जारी रहेगी। इस श्रेणी में पांच प्रतिशत तक अल्कोहल वाले पेय पर प्रति बल्क लीटर 12 रुपये का शुल्क लगेगा, जबकि पांच प्रतिशत से आठ प्रतिशत के बीच अल्कोहल सामग्री वाली बीयर के लिए 20 रुपये प्रति बल्क लीटर शुल्क रहेगा।

अधिकारियों ने कहा है कि मसौदे पर सार्वजनिक परामर्श के बाद आगे विचार किया जाएगा, जिसके दौरान वित्त विभाग द्वारा आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा की जाएगी।

यदि इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह कदम हाल के वर्षों में कर्नाटक की आबकारी नीति में सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक हो सकता है।

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